फाइनेंस डेस्क – तो बात ये है कि जून का महीना भारत की प्राइवेट सेक्टर एक्टिविटी के लिए धमाकेदार रहा। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस – दोनों ही खूब तेजी में हैं। कंपोजिट PMI स्कोर 61.0 पर पहुंच गया, जो कि सीधा 14 महीने का सबसे ऊंचा लेवल है।
अब देखते हैं इसके पीछे की वजहें क्या हैं?
एक्सपोर्ट का जलवा – जून में विदेशी ऑर्डर्स की बाढ़ सी आ गई। 2014 से अब तक का सबसे बड़ा उछाल। दुनिया को “Made in India” खूब पसंद आ रहा है।
घर की डिमांड भी कम नहीं – भारत में लोग अब खूब ऑर्डर दे रहे हैं, बिज़नेस वाले कह रहे हैं कि टेक्नोलॉजी और एफिशिएंसी बढ़ाने में पैसा लगाया है – और वही काम आ रहा है।
नौकरी की बहार – जब ऑर्डर आ रहे हैं तो कंपनी वालों ने कहा, “बुलाओ और लोगों को!” मैन्युफैक्चरिंग में हायरिंग अपने सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गई है।
महंगाई थोड़ी शांत हुई है – खर्चे बढ़ तो रहे हैं, लेकिन धीरे। कंपनियों को मुनाफे में थोड़ी राहत मिली है। मार्जिन बच रहे हैं।
लेकिन थोड़ा झटका भी है – सर्विस सेक्टर में कॉन्फिडेंस थोड़ा डगमगा गया है, और तेल की बढ़ती कीमतें भी चिंता बढ़ा रही हैं।
तो क्या इसका मतलब है कि सब मस्त है?
लगभग हां… लेकिन पूरी तरह नहीं। अभी सबकुछ ठीक चल रहा है – ऑर्डर आ रहे हैं, लोग काम पर रखे जा रहे हैं, और खर्च काबू में है। लेकिन अगर तेल की कीमतें और जियो-पॉलिटिक्स का हंगामा बढ़ा, तो कहानी थोड़ी करवट ले सकती है।

