भारतीय शेयर बाजार अपनी सर्वकालिक ऊंचाई पर कारोबार कर रहा है. चारों तरफ खरीदारी का माहौल है. सेंसेक्स 70 हज़ारी से कब 71 हज़ारी होकर 72 हज़ार के करीब पहुँच गया किसी को पता ही नहीं चला. अब जबकि बाज़ार पानी ऊंचाई पर है तो सबसे बड़ा सवाल ये है कि अभी और कितना आगे , या फिर बाजार ओवर वेट हो गया है और एक करेक्शन की मांग कर रहा है. बाजार की अगले हफ्ते क्या चाल रहेगी और कौन से ट्रिगर होंगे जिनसे बाजार और ऊपर या नीचे जा सकता है.
पिछले हफ्ते भारतीय शेयर बाज़ारों में तेज़ी के लिए मुख्य रूप से अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले को कारण था. फेड ने न सिर्फ ब्याज ड्रोन में कोई हेरफेर नहीं किया था बल्कि 2024 के लिए भी इस बात का संकेत दिया था कि तीन बार ब्याज दरों में कटौती हो सकती है. इस खबर से पूरी दुनिया के शेयर बाजार उछले, चूँकि भारतीय बाजार का साइज बड़ा है इसलिए यहाँ तेज़ी भी बड़ी देखी गयी.अब सभी का ध्यान बैंक ऑफ जापान के नीतिगत फैसले पर है जिसकी घोषणा 19 दिसंबर को की जाएगी. इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिका और चीन के व्यापक आर्थिक आंकड़े भी बाजार के का मूड तय करेंगे।
बाजार के जानकारों के मुताबिक तकनीकी रूप से निकट अवधि में बाजार में गिरावट आ सकती है, बावजूद इसके कि बाजार का परिदृश्य तेजड़ियों के पक्ष में बना हुआ है। घरेलू और वैश्विक दोनों मोर्चों से सकारात्मक संकेतकों के कारण बाजार नई ऊंचाई पर पहुंच गया। मजबूत घरेलू औद्योगिक उत्पादन और पीएमआई डेटा के साथ-साथ जीडीपी पर रिजर्व बैंक के पॉज़िटिव रुख के कारण शेयर बाजार ऊंचाई पर पहुंच गया। इसके अलावा अमेरिका में बॉन्ड यील्ड घटने और फेडरल रिजर्व द्वारा 2024 में कई बार नीतिगत दर में कटौती के संकेत मिलने से बाजार को बल मिला है.
बाजार के जानकारों के मुताबिक ऊंचे मूल्यांकन और अल नीनो को लेकर चिंता के कारण ऐसा हो सकता है कि निकट अवधि में बाज़ार में कुछ ‘नकारात्मक पहलू’ उभरें। बता दें कि पिछले सप्ताह सेंसेक्स में 1,658.15 और निफ्टी में 487.25 अंकों का उछाल आया. पिछले हफ्ते के अंतिम कारोबारी सत्र को सेंसेक्स 969.55 अंक का उछाल आया और पहली बार 71,000 के पार बंद हुआ. वहीँ निफ्टी 273.95 अंक चढ़कर 21,456.65 के नए शिखर पर बंद हुआ.

