नई दिल्ली। भगदौड़ भरी जिंदगी और इससे छुटकारा पाने का टारगेट इसतना आसान नहीं होता जितना लोग सोचते हैं और फिर शांत बैठ जाते हैं। आज के समय में निवेश, इनकम और रोजगार बेहद मुश्किलों से साथ देने वाली चीजों में से एक बन गए हैं। लेकिन इंश्योरेंस आज भी ऐसी व्यवस्था या विकल्प बनी हुई है जो आपके जीवन को कहीं न कहीं सुरक्षा का एहसास तो कराती ही है।
एक्सपर्टस का मानना है कि किसी भी ऐसे व्यक्ति को टर्म इंश्योरेंस लेना ही चाहिए जो परिवार का एकलौता कमाऊ सदस्य है। चूंकि इसी सदस्य पर पूरे परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी होती है। आजकल लोग ऐसा कोई भी कार्य करना पसंद नहीं करते जिससे कोई रिटर्न नहीं मिलता हो। इंश्योरेंस एजेंट भी आम लोगों में इस आदत के विकसित होने में काफी हदतक जिम्मेदार हैं। अब सवाल यह उठता है कि इस आदत को बदला कैसे जाए?
चलिए एक उदाहरण लेते हैं जो ताइवान में सामने आया था। ताइवान में 1951 तक नेशनल लॉटरी सिस्टम लागू था। इस सिस्टम में लोगों की खुदरा खरीदारी की रसीदों को टिकट मान लिया जाता था। उस समय पूरे ताइवान में एक समान रसीद का चलन था, जिनमें एक जैसी नंबरिंग भी होती थी। ताइवान में हर दूसरे महीने लॉटरी के विजेताओं की घोषणा की जाती थी। इसमें इनाम बहुत बड़ा होता था। उदाहरण के लिए पहला इनाम 2.3 करोड़ रुपये के बराबर होता था और अंतिम इनाम 460 रुपये तक हो सकता था। इसमें विजेता के चयन के लिए ग्रेडेशन सिस्टम का प्रयोग किया जाता था। इसमें सौदे की कीमत के हिसाब से लोग इनाम के हकदार होते थे।
भारत में इस तरह के तरीकों से टैक्स में ईमानदारी का चलन लाया जा सकता है। इस सिस्टम में ग्राहक रसीद लेने की इच्छा जताएंगे। वैसे, भारत के मामले में ऐसा कुछ नहीं होने जा रहा है। इन उदाहरणों का मतलब बस इतना है कि अजीब चीजें लोगों के व्यवहार को बदल सकती हैं। यह बहुत अच्छा भी हो सकता है और कई मामलों में बुरा भी। पर्सनल फाइनेंस के मामले में बहुत सी ऐसी चीजें हैं जो ठीक नहीं हैं, उनको बदलने की जरूरत है। कुछ नया सोचने की जरूरत है।

