देश में पिछले दो-तीन सालों से रियल एस्टेट सेक्टर में तेजी देखने को मिल रही है, अब इसको लेकर एक डेटा सामने आया है, जिसमें बताया गया है कि साल 2018-23 के दौरान रियल एस्टेट सेक्टर में 9.63 लाख करोड़ रुपये के लोन मंजूर किए गए। यह भी अनुमान लगाया गया है कि अगले तीन सालों में 14 लाख करोड़ रुपये के लोन फाइनेंस होने की संभावना है।
रियल एस्टेट डेटा एनालिस्ट प्रॉपस्टैक की एक संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले छह सालों में भारत में रियल एस्टेट सेक्टर में 9,63,441 करोड़ रुपये के लोन मंजूर किए गए हैं। फर्म के मुताबिक, 2024-2026 के बीच भारतीय रियल एस्टेट के कुल लोन मार्केट में 14,00,000 करोड़ रुपये ($170 बिलियन) के फाइनेंसिंग अवसर होने की संभावना है। देश के शीर्ष सात शहरों में स्वीकृत ऋणों के विश्लेषण से पता चलता है कि पिछले छह वर्षों में स्वीकृत कुल ऋणों में से 80 प्रतिशत मुंबई, दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु में स्वीकृत किए गए।
रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि के दौरान, 2018 में IL&FS द्वारा उत्पन्न NBFC संकट और 2020 में कोविड महामारी के दुष्प्रभावों जैसी चुनौतियों ने ऋण बाजार में मंदी पैदा कर दी थी। लेकिन 2021 से रियल एस्टेट बाजारों के पुनरुद्धार ने उधारदाताओं और उधारकर्ताओं दोनों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। देश भर में 1,22,553 रियल एस्टेट प्रोजेक्ट और 86,262 रियल एस्टेट एजेंट पंजीकृत हैं। रेरा के कार्यान्वयन में कुछ राज्य दूसरों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। अनुमान है कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, वर्ष 2030 तक संपत्ति बाजार का आकार एक ट्रिलियन डॉलर तक होना चाहिए।

