वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार केंद्रीय बजट में कई ऐसे प्रावधान कर सकती हैं जिसमें टैक्स का बोझ कम करना भी शामिल है। भारत में कुल करदाताओं में वरिष्ठ नागरिकों की भी अच्छी खासी संख्या है। इसकी वजह अलग-अलग स्रोतों से उनकी आय है। हालांकि, जैसे-जैसे जीवन-यापन की लागत बढ़ रही है, वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयकर कम करने की वकालत भी हो रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक सरकार वरिष्ठ नागरिकों के कई तरीकों से आयकर के बोझ को कम कर सकती है। सरकार सीनियर सिटीजन्स को Mediclaim के स्तर पर अतिरिक्त लाभ दे सकती है। Covid की चुनौतियों के बाद की स्थिति को देखते हुए सरकार 80(डी) के तहत मेडिक्लेम के 1 लाख रुपये तक के प्रीमियम को टैक्स फ्री कर सकती है। यह सीमा फिलहाल 50,000 रुपये है। अगर यह सीमा बढ़ती है तो वरिष्ठ नागरिक ज्यादा रकम का मेडिक्लेम भी ले सकते हैं।
सरकार 75 साल से ज्यादा उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने से छूट को घटाकर 60 साल या 65 साल कर सकती है। हालांकि, यह शर्त रख सकती है कि इस उम्र में भी वरिष्ठ नागरिक कहीं नौकरी न कर रहे हों, सिर्फ पेंशन या ब्याज ही उनकी मुख्य आय होनी चाहिए।
80(सी) के तहत सरकार कई तरह की टैक्स छूट देती है। इसमें ईएलएसएस या एफडी में 5 साल का लॉक-इन पीरियड होता है। सरकार चाहे तो इस लॉक-इन पीरियड की व्यवस्था को वरिष्ठ नागरिकों के लिए थोड़ा तार्किक बना सकती है। सरकार वरिष्ठ नागरिकों को टैक्स में राहत देने के लिए कैपिटल गेन्स टैक्स से छूट दे सकती है। क्योंकि रिटायरमेंट के बाद उनकी आय मुख्य रूप से अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट, बॉन्ड और डिविडेंड में निवेश पर मिलने वाले रिटर्न पर निर्भर करती है।

