विदेशी निवेशकों ने अगस्त महीने अब तक देश के बॉन्ड बाजार में 11,366 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इसके साथ ही इस साल बॉन्ड सेक्टर में शुद्ध पूंजी प्रवाह एक लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इस 24 अगस्त तक बॉन्ड बाजार में 11,366 करोड़ रुपये का निवेश किया है। जुलाई में भारतीय बॉन्ड बाजार में 22,363 करोड़ रुपये, जून में 14,955 करोड़ रुपये और मई में 8,760 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश हुआ था।
इससे पहले उन्होंने अप्रैल में 10,949 करोड़ रुपये निकाले थे। बाजार विश्लेषकों ने बताया कि अक्टूबर 2023 में भारत के शामिल होने की घोषणा के बाद से ही एफपीआई वैश्विक बांड सूचकांकों में इसके शामिल होने की उम्मीद में अपना निवेश आगे बढ़ा रहे हैं। और इसके शामिल होने के बाद भी पूंजी प्रवाह मजबूत बना हुआ है। दूसरी ओर येन कैरी ट्रेड वाले देश से उधार लेकर दूसरे देश की संपत्ति में निवेश करने की परंपरा खत्म होने, अमेरिका में मंदी की आशंका और वैश्विक स्तर पर जारी संघर्षों के कारण FPI ने इस महीने अब तक equity से 16,305 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की है।
विशेषज्ञों के मुताबिक बजट में इक्विटी निवेश पर पूंजीगत लाभ कर में बढ़ोतरी की घोषणा ने इस बिकवाली को काफी हद तक बढ़ा दिया है। इसके अलावा भारतीय शेयरों के ऊंचे मूल्यांकन के कारण एफपीआई सतर्क हैं। साथ ही, अमेरिका में रोजगार के कमजोर आंकड़ों, नीतिगत दरों में कटौती के समय को लेकर अनिश्चितता और येन कैरी ट्रेड के खत्म होने से मंदी की बढ़ती आशंका के कारण एफपीआई सतर्क रुख अपना रहे हैं। कुल मिलाकर, भारत एफपीआई के जरिए दीर्घावधि निवेश आकर्षित कर रहा है और इस संबंध में स्थिति अनुकूल बनी हुई है।

