विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने अक्टूबर में भारतीय शेयर बाजार से ज़बरदस्त बिकवाली की। इससे पहले विदेशी निवेशक तीन महीने तक शेयर बाजार में लगातार पैसा डाल रहे थे। लोकसभा चुनाव के बाद की घबराहट कम होने और भारतीय बाजारों में स्थिरता लौटने के बाद जून और जुलाई में विदेशी निवेशक लगातार खरीदार बने रहे। लेकिन अक्टूबर शुरू होते ही उन्होंने यू टर्न मारा और भारतीय बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया।
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) के आंकड़ों के मुताबिक, 4 अक्टूबर तक एफपीआई ने भारतीय इक्विटी में 27,142 करोड़ रुपये की बिकवाली की। दलाल -स्ट्रीट के विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक इक्विटी बाजारों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है। लेकिन बाजारों ने अब तक इन तनावों को नजरअंदाज किया है। हालांकि हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, लेकिन अभी तक कोई तेज उछाल नहीं आया है। उधर चीनी शेयरों के बेहतर प्रदर्शन ने भी भारतीय बाजार में बिकवाली को बढ़ावा दिया है। इस बिकवाली का एक बड़ा हिस्सा अकेले गुरुवार को हुआ, जिसकी कीमत 15,243 करोड़ रुपये थी, जो पिछले चार सालों में विदेशी निवेशकों द्वारा की गई सबसे बड़ी दैनिक निकासी है।
एफपीआई द्वारा चीन में किए गए निवेश को वापस लौटाने के बारे में चिंताएं बढ़ रही हैं, विशेष रूप से तब जब बीजिंग अपनी संकटग्रस्त अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने और अपने पूंजी बाजारों को मजबूत करने के लिए नीतिगत उपायों को लागू कर रहा है। बाजार के जानकार काफी दिनों से भारतीय बाजार के ओवर वैल्यूएशन की बातें कर रहे थे और एक करेक्शन की बात भी लेकिन ये करेक्शन इतना डीप होगा इसका अंदाज़ा नहीं था.

