नयी दिल्ली। कोरोनावायरस का कहर शेयर बाजारों पर बुरी तरह टूटा। इससे घरेलू निवेशकों के साथ विदेशी निवेशकों का भी मनोबल काफी टूट गया और उन्होंने भारतीय पूंजी बाजार में खूब बिकवाली। ताजा आंकड़ों के अनुसार कोरोनोवायरस के कारण वैश्विक आर्थिक मंदी की चिंता के बीच विदेशी निवेशकों (एफपीआई) ने डेवलपिंग यानी विकासशील एशियाई देशों में से करीब 26 अरब डॉलर निकाल लिए है। इसमें से एफपीआई ने सिर्फ भारत से 16 अरब डॉलर की रकम निकाली है। एक रिपोर्ट के अनुसार कोरोना महामारी के चलते सरकारें क्रेडिट मार्केट को सहारा देने वाली और आर्थिक गतिविधियों को स्थिर करने वाली मौद्रिक और राजकोषीय नीतियां लागू कर रही हैं।
अप्रैल में एफपीआई ने भारतीय पूंजी बाजारों में 15403 करोड़ रुपये की बिकवाली की। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार एफपीआई ने 1 से 30 अप्रैल के दौरान इक्विटी सेगमेंट से 6,884 करोड़ रुपये और डेब्ट सेगमेंट से 8,519 करोड़ रुपये निकाले। हालांकि मार्च के मुकाबले एफपीआई का भरोसा थोड़ा बढ़ा है। मार्च में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों में रिकॉर्ड 1.1 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की थी।
मार्केट एक्सपर्ट बताते हैं कि विदेशी निवेशक जितना भी निवेश भारत में कर रहे हैं वो लगभग सारा का सारा एनबीएफसी और फार्मा सेक्टर में आ रहा है। मगर जानकारों का अनुमान है कि विमानन सेक्टर की हालत खस्ता है। जानकार मानते हैं कि दुनिया भर की कई एयरलाइंस मई 2020 तक दिवालिया हो सकती हैं। इस बीच चीन, अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया का फैक्ट्री उत्पादन 2020 के पहले महीनों में घट गया। ये सभी कारण आर्थिक मंदी का कारण बन रहे हैं।
हाल ही में अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए केंद्र सरकार ने करीब 21 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज का ऐलान किया है, जिसके जरिए कई सेक्टरों को आर्थिक मदद दी जाएगी। इनमें एमएसएमई शामिल है। इसके अलावा सरकार ने कई सेक्टरों में रिफॉर्म्स लाने का भी ऐलान किया। एमएसएमई को कुछ नियमों में भी ढील दी जाएगी।

