कोरोनावायरस के चलते दुनिया के अधिकतर देशों में आर्थिक गतिविधियां लगभग बंद पड़ी हैं। हाल के दिनों में सभी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के शेयर बाजार में 30 फ़ीसदी तक की गिरावट देखने को मिली। इसका असर शेयरों में निवेश करने वाले म्यूचुअल फंडों की स्कीमों पर भी पड़ा है और उनकी वैल्यू कम हुई है। निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की चिंता सताने लगी है। लेकिन बाजार की तुलना में म्यूचुअल फंड स्कीमों के प्रदर्शन पर गौर करें तो पिछले 5 वर्षों के दौरान ज्यादातर स्कीमों ने अंडरपरफॉर्म किया है।
एसएंडपी इंडिसेज वर्सेज एक्टिव (SPIVA) रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2019 तक 5 वर्षों की अवधि में ज्यादातर फंडों ने अंडरपरफॉर्म किया है। यहां गौर करने वाली बात यह है कि ज्यादातर ऐसेट मैनेजमेंट कंपनियां (एएमसी) निवेशकों को यह कहकर लुभाती हैं कि शॉर्ट टर्म के उतार-चढ़ाव से बचने के लिए निवेशकों को मध्यम से लंबी अवधि के लिए पैसा लगाना चाहिए।
SPIVA की स्टडी बताती है कि इक्विटी फंडों में 82.29 फ़ीसदी लार्ज कैप फंड, 78.38 फ़ीसदी इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम फंड (ईएलएसएस) और 40.9 फ़ीसदी मिड-स्मॉल कैप इक्विटी फंडों ने 5 साल में अपने-अपने इंडेक्स की तुलना में अंडरपरफॉर्म किया है।
अगर निवेशक यह सोचते हैं कि 5 साल से अधिक समय के लिए निवेश करने पर उन्हें बेहतर रिटर्न मिलेगा तो उनका यह मानना भी गलत हो सकता है। एसएंडपी डाऊ जोंस में ग्लोबल रिसर्च के एसोसिएट डायरेक्टर आकाश जैन कहते हैं कि सक्रिय रूप से मैनेज किए जाने वाले अधिकतर लार्ज कैप इक्विटी फंडों ने खराब प्रदर्शन किया है। दिसंबर 2019 तक 10 वर्षों की अवधि में 64.8 फ़ीसदी लार्ज कैप फंडों का प्रदर्शन बीएसई 100 की तुलना में खराब रहा है।
शॉर्ट टर्म में भी स्थिति कुछ अच्छी नहीं लगती। दिसंबर 2019 तक 1 साल की अवधि में देखें तो बीएसई 100, 10.92 फ़ीसदी बढ़ा, जबकि इस दौरान लार्ज कैप इक्विटी फंडों में से 40 फ़ीसदी ने बेंचमार्क की तुलना में कम रिटर्न दिया। मिड और स्मॉल कैटेगरी के फंडों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। इनका रिटर्न बीएसई 400 मिड-स्मॉल कैप इंडेक्स की तुलना में बेहतर रहा है, निवेश की अवधि चाहे जो हो।

