कोरोना महामारी के चलते अधिकतर सेक्टर्स पर बुरा असर पड़ा है. हालांकि एमएसएमई की बात करें तो इस पर न सिर्फ कोरोना महामारी का बल्कि नोटबंदी और जीएसटी कांप्लेक्सिटी का भी असर पड़ा है. मोदी सरकार के प्रो-एंटरप्रेन्योरशिप स्कीम PMEGP (प्राइम मिनिस्टर्स एंप्लॉयमेंट जेनेरेशन प्रोग्राम) के तहत शुरु किए जाने वाले माइक्रो-एंटरप्राइजेज की संख्या में पिछले वित्त वर्ष 2019-20 में गिरावट रही. वित्त वर्ष 2019 में 73427 पीएमईजीपी माइक्रो-एंटरप्राइजेज सेट अप किए गए जबकि वित्त वर्ष 2019-20 में इसमें 9.2 फीसदी की गिरावट रही और महज 66,653 माइक्रो-एंटरप्राइजेज ही शुरू हो पाए.
खादी एंड विलेज इंडस्ट्रीज कमीशन (केवीआईसी) द्वारा इंप्लीमेंटेड बेनेफिशियरी यूनिट्स के जरिए रोजगार निर्माण में भी गिरावट रही. वित्त वर्ष 2019 में 5.87 लाख रोजगार निर्माण हुआ जबकि वित्त वर्ष 2020 में 5.33 लाख. इससे पहले वित्त वर्ष 2019 में वित्त वर्ष 2018 की तुलना में माइक्रो फर्म्स और रोजगार निर्माण की दर अधिक रही थी. वित्त वर्ष 2018 में 48398 फर्म्स सेटअप किए गए थे जबकि 3.87 लाख रोजगार का निर्माण हुआ था. केवीआईसी के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना से इस मामले में बातचीत के लिए संपर्क नहीं हो सका.
केवीआईसी की एक हालिया स्टडी के मुताबिक पीएमईजीपी के तहत 88 फीसदी माइक्रो-बेनेफिशएरीज पर कोरोना महामारी का नकारात्मक प्रभाव पड़ा. इन 88 फीसदी लोगों में 57 फीसदी लोगों के यूनिट्स कोरोवा काल में अस्थायी तौर पर बंद हो गए जबकि 30 फीसदी लोगों ने प्रोडक्शन और रेवेन्यू में गिरावट की बात कही है. केवीआईसी के आंकड़ों के मुताबिक पीएमईजीपी के तहत 24 मार्च 2021 तक 60867 माइक्रो एंटरप्राइजेज को 1834.2 करोड़ रुपये मार्जिन मनी के रूप में दिए गए. पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के इंडस्ट्री कमेटी के उपप्रमुख विश्वनाथ के मुताबिक एंटरप्राइजेज पर सिर्फ कोरोना का ही असर नहीं पड़ा है बल्कि इस पर अन्य बातों का भी प्रभाव पड़ा है. नोटबंदी, जीएसटी कांप्लैक्सिटी इत्यादि के चलते एमएसएमई पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा. विश्वनाथ के मुताबिक कोरोना ने 20-25 फीसदी एमएसएमई को प्रभावित किया जिन्होंने अपना प्रोडक्शन या तो कम कर दिया या अपने ऑपरेशंस बंद कर दिए लेकिन जीएसटी समस्या और नोटबंदी ने बुरी तरह प्रभावित किया.

