नई दिल्ली: कोल कंपनियों के लिए एक नए लैंड एक्विजिशन मॉडल में एक माइनिंग प्रोजेक्ट से प्रभावित परिवारों को उस प्रोजेक्ट का 10 पर्सेंट रेवेन्यू देने की योजना बनाई जा रही है। इसके अलावा कोल निकालने की अवधि पूरी होने के बाद जमीन उसके मालिकों को वापस भी की जाएगी।
इस प्रपोजल का प्रपोजल एडिशनल कोल सेक्रेटरी वी के तिवारी ने हाल की एक मीटिंग में दिया था। इससे ऑपरेशन की कॉस्ट 10 पर्सेंट घटने और लैंड एक्विजिशन आसान होने की उम्मीद है। इस योजना को जल्द ही कोल इंडिया की दो सब्सिडियरी में परीक्षण के आधार पर लागू किया जाएगा। अगर जरूरत पड़ी तो इसके लिए कानून में संशोधन किया जा सकता है। ईटी ने इस प्रपोजल से जुड़े दस्तावेज देखे हैं।
प्रपोजल में एक्विजिशन के समय जमीन की कीमत का 20 पर्सेंट देना शामिल है। बाकी का भुगतान कोल निकालने पर एन्युटी के तौर पर किया जाएगा।
सरकार की योजना प्रभावित परिवारों के साथ 10 पर्सेंट रेवेन्यू डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर के जरिए साझा करने की है। प्रभावित परिवारों को 15,000 रुपये प्रति माह की दर पर रोजगार की भी पेशकश की जाएगी।
माइनिंग कंपनियों को लैंड एक्वायर करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि जमीन मालिक परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए रोजगार की मांग करते हैं और कई बार वे जमीन देने से मना कर देते हैं।
हालांकि, माइनिंग कंपनियों के एग्जिक्यूटिव्स का कहना है कि इस तरह के लाभ देने से कंपनियों को घाटा होगा। मुआवजे और पुनर्वास का खर्च भी लगभग 15 पर्सेंट बढ़ गया है। जमीन की कीमत में 5-40 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई है।

