वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 23 जुलाई को संसद में बजट पेश करेंगी। इस बजट से होटल उद्योग (हॉस्पिटैलिटी सेक्टर) की कंपनियां चाहती हैं कि सरकार आगामी आम बजट में होटल सेक्टर को इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का दर्जा दे, जिससे नई संपत्तियों में निवेश और आकर्षक हो जाएगा।
आतिथ्य क्षेत्र की कंपनियां चाहती हैं कि सरकार आगामी बजट में पर्यटन एजेंडे को गति देने पर ध्यान दे क्योंकि यह देश के आतिथ्य क्षेत्र को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान देने वाला एक महत्वपूर्ण ‘इंजन’ और रोजगार सृजन का जरिया बनाने का एक बड़ा अवसर है। होटल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एचएआई) के अध्यक्ष के बी काचरू के मुताबिक होटल उद्योग हाई टैक्सेशन के बोझ तले दबा हुआ है। इसके अलावा लाइसेंस, परमिट और अनुपालन की प्रक्रिया भी काफी एक्सपेंसिव है। होटल चलाने की लागत काफी अधिक है। काचरू ने कहा कि इन्वेस्टमेंट की बेहतर दर के साथ होटल इन्वेस्टमेंट को अधिक आकर्षक बनाने और ease of doing business को बढ़ावा देने की जरूरत है।
वहीँ इस बजट से घरेलू दवा उद्योग चाहता है कि सरकार आगामी बजट में इस सेक्टर में शोध एवं विकास (आरएंडडी) को बढ़ावा देने के लिए कॉरपोरेट टैक्स में रियायत दे और प्रभावी बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) व्यवस्था स्थापित करने के लिए कदम उठाए।
ऑर्गनाइजेशन ऑफ फार्मास्युटिकल प्रोड्यूसर्स ऑफ इंडिया (ओपीपीआई) के महानिदेशक अनिल मताई ने बजट को लेकर उद्योग की मांग रखते हुए कहा कि सरकार को शोध एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाने चाहिए। इसके लिए इंटरनेशनल कंपनियों को रिसर्च एंड डेवलपमेंट से जुड़े प्रोत्साहन दिए जाने चाहिए और इस सेक्टर को कॉरपोरेट टैक्स में छूट दी जानी चाहिए।

