इंदौर शहर में रेडीमेड कपड़ों के कई व्यापारियों और दुकानदारों ने धोखाधड़ी और बैंक खातों के फ्रीज होने की बढ़ती घटनाओं के बाद ऑनलाइन या यूपीआई के जरिए भुगतान न लेने का फैसला किया है। व्यापारियों का आरोप है कि अगर कोई जालसाज उनकी दुकानों से कपड़े खरीदता है और ठगी के जरिए ठगे गए पैसे से ऑनलाइन या यूपीआई के जरिए उनके बैंक खाते में भुगतान करता है तो पुलिस और जांच एजेंसियां दुकानदार का पूरा खाता फ्रीज कर देती हैं।
व्यापारियों ने दुख जताया कि दुकानदारों को पता ही नहीं होता कि उन्हें ऑनलाइन भुगतान किया गया पैसा किसी और के बैंक खाते से चुराया गया है, फिर भी एजेंसियां उनका पूरा बैंक खाता फ्रीज कर देती हैं और उन्हें अपना कारोबार जारी रखने में काफी परेशानी और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है।
‘इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन’ के अध्यक्ष अक्षय जैन के मुताबिक, दुकानदारों ने साइबर धोखाधड़ी की आशंका और बैंक खाते फ्रीज होने से होने वाली आर्थिक परेशानियों के चलते यूपीआई या ऑनलाइन भुगतान न लेने की असमर्थता जताते हुए अपनी दुकानों पर पोस्टर लगा दिए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि यदि 1000 रुपये का भुगतान धोखाधड़ी के पैसे से किया जाता है, तो उस दुकानदार के खाते में केवल 1000 रुपये ही रोके जाने चाहिए, जिसने वह भुगतान प्राप्त किया है, लेकिन उसका पूरा बैंक खाता बिना किसी कारण के फ्रीज कर दिया गया है। नतीजतन, व्यापारियों ने केवल नकद भुगतान या कार्ड के माध्यम से भुगतान को प्रोत्साहित और प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है।
हालांकि, पुलिस का कहना है कि ऑनलाइन भुगतान या यूपीआई लेनदेन से इनकार करना गलत है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यदि किसी बैंक खाते में धोखाधड़ी के पैसे का लेनदेन पाया जाता है तो उसे फ्रीज कर दिया जाता है, लेकिन यदि खाताधारक कानूनी प्रमाण-पत्र और आवश्यक दस्तावेज दिखाता है तो खाते को रिलीज कर दिया जाता है और उससे लेनदेन की अनुमति दी जाती है।

