मेडिकल के लगातार बढ़ते बिलों के दौर में स्वास्थ्य बीमा आपके जीवन के लिए बहुत ज़रूरी होता है, कोई भी हेल्थ पालिसी एक वर्ष के लिए वैध होती है ऐसे में अपनी पॉलिसी का समय पर नवीनीकरण कराना बहुत जरूरी है। हेल्थ पालिसी लैप्स होने का मतलब आपको आर्थिक नुकसान समेत कई परेशानियों का सामना। ध्यान रखें कि यदि आप नियत तारीख तक अपने नवीनीकरण प्रीमियम का भुगतान करने से चूक जाते हैं तो आपकी चिकित्सा या स्वास्थ्य पॉलिसी तुरंत समाप्त नहीं होती है, आपको नवीनीकरण के लिए अतिरिक्त समय मिलता है जो आमतौर पर 15 से 30 दिन का होता है। यदि आप इस छूट अवधि के भीतर भी प्रीमियम का भुगतान नहीं करते हैं तभी आपकी मेडिक्लेम पॉलिसी रद्द हो सकती है और दावा खारिज हो सकता है।
सबसे पहले तो यह समझ लीजिये कि आपको कवर तभी मिलता है जब आपके पास एक्टिव हेल्थ इंश्योरेंस हो। ऐसे में कवरेज निरंतर बना रहे इसके लिए आपको नियत तिथि पर प्रीमियम का भुगतान करना चाहिए। कवरेज अगर नहीं होगा तो किसी भी मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में आपको अपनी जेब से खर्च करना पड़ सकता है। यानि कि स्वास्थ्य बीमा का लाभ नहीं मिलने से न केवल वित्तीय नुकसान हो सकता है और इलाज में भी देरी हो सकती है।
अगर आप अपनी हेल्थ पॉलिसी के खिलाफ दावा नहीं करते हैं तो सभी स्वास्थ्य बीमा कंपनी प्रीमियम में बोनस या छूट देने की हकदार है। इसे नो क्लेम बोनस कहा जाता है, ऐसी स्थिति में अगर आप छूट अवधि के भीतर भी पॉलिसी को नवीनीकृत करने में नाकाम रहते हैं तो आप छूट और स्वास्थ्य बीमा लाभ पूरी तरह से खो सकते हैं। हेल्थ इन्शुरन्स कंपनियाँ कुछ चिकित्सीय स्थितियों के विरुद्ध दावा करने के लिए वेटिंग पीरियड लगा सकती हैं। इन शर्तों में पॉलिसी शर्तों के आधार पर कुछ पूर्व-मौजूदा बीमारियाँ, मातृत्व लाभ या अन्य विशिष्ट चिकित्सा स्थितियाँ शामिल हो सकती हैं। जब आप अपनी पॉलिसी का नवीनीकरण नहीं कराते हैं तो आपके द्वारा दी गई प्रतीक्षा अवधि किसी काम की नहीं होगी क्योंकि आप इस बार नई स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदेंगे और आपको अधिक प्रीमियम चुकाना पड़ सकता है.अगर आप अपनी हेल्थ इन्शुरन्स पॉलिसी को समय पर रिनीवल नहीं करते हैं, तो आप आयकर अधिनियम 1961 की धारा 80 डी के तहत बीमा पॉलिसियों पर टैक्स कटौती का लाभ नहीं उठा पाएंगे।

