नई दिल्ली। दुनिया के सबसे बड़े निवेशक माने जाने वाले वॉरेन बफे की कंपनी बर्कशायर हैथवे को पहली तिमाही में करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये (50 अरब डॉलर) का नुकसान हुआ है। यह नुकसान वॉरेन बफे की छवि के विपरीत है। आमतौर पर वॉरेन बफे की छवि हर स्थिति में शेयर बाजार से पैसा बनाने की है। वित्तीय बाजार के कई दिग्गजों का मानना है कि अगर वॉरेन बफे कोरोना महामारी के चलते होने वाले नुकसान का अंदाजा नहीं लगा पाए, तो बाकियों के लिए यह काफी कठिन काम है। दिग्गज निवेशक वॉरेन बफे की कंपनी बर्कशायर हैथवे को 50 अरब डॉलर का घाटा हुआ है। कोविड-19 महामारी ने उनके स्टॉक निवेश को तगड़ा झटका दिया है। हालांकि इस दौरान ऑपरेटिंग प्रॉफिट में वृद्धि हुई है। यह जानकारी कंपनी ने शनिवार को हुई अपनी वार्षिक साधारण सभा (एजीएम) में दी है।
इस दौरान बताया गया कि बर्कशायर की पहली तिमाही का शुद्ध घाटा 49.75 अरब डॉलर या प्रति शेयर 30,653 डॉलर रहा है। निवेश से कुल घाटा 54.52 अरब डॉलर रहा है। यह घाटा मुख्य रूप से आम शेयरों की कीमतों में गिरावट से हुआ है। एक साल पहले, कुल नेट अर्निंग 21.66 अरब डॉलर या प्रति शेयर 13,209 डॉलर थी।
इसके विपरीत कंपनी का तिमाही परिचालन लाभ 6 प्रतिशत बढ़कर 5.87 अरब डॉलर हो गया। वॉरेन बफे इसे बेहतर प्रदर्शन का पैमाना मानते हैं। यह लाभ 3,624 डॉलर प्रति शेयर रहा है। अनरियलाइज्ड स्टॉक्स से होने वाले नफा-नुकसान और आय की रिपोर्टिंग के लिए बर्कशायर को एकाउंटिंग रूल की आवश्यकता होती है।
बहरहाल, बर्कशायर ने इस दौरान भी थोड़े स्टॉक्स अपने पोर्ट फोलियो में बढ़ाए हैं। हालांकि बफे उन बड़ी कंपनियों को खोजने में असमर्थ रहे, जिनमें एक साथ पैसा लगाया जा सके। बर्कशायर के पास 137.3 अरब डॉलर की नकदी है।

