नयी दिल्ली: रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 2020 की मार्च तिमाही में भारत की सबसे अधिक लाभ कमाने वाली कंपनी का ताज खो दिया है। अब ये ताज 6 साल टाटा ग्रुप की टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के पास आ गया है। मुनाफे के मामले में रिलायंस के पिछड़ने की असल वजह है कोरोनावायरस। जनवरी-मार्च तिमाही में जहां टीसीएस ने 8049 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया, जबकि रिलायंस का मुनाफा 6348 करोड़ रुपये रह गया। तिमाही में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के कारण रिलायंस के मुनाफे में 39 फीसदी की गिरावट आई। मार्च तिमाही में मुनाफे के मामले में टीसीएस ने रिलायंस को बेशक पछाड़ दिया, मगर अन्य फाइनेंशियल मामलों में जैसे कुल आमदनी, ऑपरेटिंग लाभ, कुल संपत्ति, एसेट्स और बाजार पूंजीकरण (एम-कैप) के मामले में रिलायंस ही आगे रही।
यह दूसरी बार है जब टाटा समूह की कंपनी ने तिमाही आधार पर मुनाफे के मामले में मुकेश अंबानी की रिलायंस को हरा दिया। इससे पहले दिसंबर 2014 की तिमाही में, TCS का शुद्ध लाभ रिलायंस के मुकाबले थोड़ा अधिक था। जहां तक मार्च तिमाही में पिछड़ने का सवाल है तो कोरोना से कच्चे तेल की कीमतों और मांग में गिरावट से रिलायंस को 4245 करोड़ रुपये का इंवेंट्री घाटा हुआ है। साथ ही मार्च तिमाही में रिलायंस का मुनाफा 30 तिमाहियों में पहली बार घटा है, जिसका मतलब है कि कंपनी की प्रति शेयर आमदनी में भी कमी आई।
बता दें कि रिलायंस अब भी करीब दो दशकों से प्राइवेट सेक्टर में सबसे अधिक मुनाफे वाली कंपनी बनी हुई है। तिमाही में टीसीएस से पिछड़ने के बावजूद पूरे वित्त वर्ष 2019-20 में जहां रिलायंस ने 39,354 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया, वहीं टीसीएस 32340 करोड़ रुपये का मुनाफा ही कमा सकी। इन कंपनियों की बदलती किस्मत उनकी एम-कैप में दिखती है। अब लगभग एक दशक हो चुका है कि एम-पैक के मामले में देश की सबसे मूल्यवान कंपनियों में से इन दोनों के बीच बिल्ली और चूहे का खेल चल रहा है। ये दोनों कंपनियां समय समय एक दूसरे को पीछे छोड़ती रहती हैं।

