नई दिल्ली: अगले वित्त वर्ष से ज्यादा वेतन पाने वालों को पीएफ, पेंशन फंड और नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) में भी निवेश करने से आयकर से राहत नहीं मिलेगी। अगले वित्त वर्ष 2020-21 के आम बजट में प्रस्ताव है कि इन तीनों श्रेणियों में नियोक्ता के योगदान के लिए वेतन सीमा 7.5 लाख रुपये तय की गई है। इससे ज्यादा वेतन पर नियोक्ता द्वारा इनमें योगदान दिया जाता है तो अतिरिक्त योगदान कर कर्मचारी को कर चुकाना होगा।
बजट दस्तावेज में कहा गया है कि उच्च वेतन पाने वाले लोग अपने पैकेज को इस तरह तय कर सकते है कि उनके वेतन का बड़ा हिस्सा नियोक्ता के अंश के तौर पर इन किस्मों के फंड में जमा कराया जाए। सरकार का मानना है कि वेतन के इस हिस्से पर किसी भी बिंदु पर टैक्स नहीं लगता है क्योंकि इन फंडों में निवेश, रिटर्न और भुगतान तीनों ही बिंदुओं (ट्रिपल ई) पर कर छूट है। इसलिए कोई उच्चतम सीमा तय न करना अन्यायपूर्ण और अवांछनीय है। इसलिए बजट में प्रस्ताव है कि अगर कोई नियोक्ता किसी कर्मचारी को 7.5 लाख रुपये तक वेतन पर एनपीएस, पेंशन और एनपीएस में अंशदान देता है तो कर्मचारी से कोई टैक्स नहीं लगेगा। लेकिन इसके अतिरिक्त अंशदान पर कर्मचारी को कर देना होगा।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि आज जब वेतन पैकेज कॉस्ट-टू-कंपनी आधार पर तय होते हैं, ऐसे में कराधान के लिहाज से यह प्रस्ताव तर्कसंगत नहीं है। इस कदम से छोटी और मझोली कंपनियां अपने कम वेतन वाले कर्मचारियों को पीएफ में अंशदान देने से हतोत्साहित होंगी।
अभी नियोक्ता के अंशदान के तौर पर किए गए भुगतान पर डिडक्शन के लिए कोई अपर लिमिट नहीं है। प्रॉवीडेंट फंड में कर्मचारी के लिए नियोक्ता द्वारा वेतन के 12 फीसदी के अतिरिक्त किए गए अंशदान पर पहले से ही टैक्स लगता है। किसी नियोक्ता द्वारा किसी मान्यता प्राप्त पेंशन फंड में कर्मचारी को 1.5 लाख से ज्यादा किए गए अंशदान को कर्मचारी के लिए पर्क (अतिरिक्त लाभ) माना जाता है। इसी तरह एनपीएस में केंद्र सरकार द्वारा वेतन का 14 फीसदी योगदान किया जाता है या अन्य नियोक्ताओं द्वारा 10 फीसदी योगदान दिया जाता है तो टैक्स नहीं लगेगा।
बजट में कहा गया है कि फंड और स्कीमों में मौजूदा वित्त वर्ष के अंत में बैलेंस पर ब्याज, लाभांश या किसी अन्य तरह के रिटर्न के तौर पर वृद्धि की जाती है तो उसे नियोक्ता के अंशदान के हिस्से की तरह पर्क माना जाएगा। यह प्रस्ताव एक अप्रैल से लागू करने का प्रस्ताव है।

