छोटी बचत योजनाओं या पोस्ट ऑफिस की योजनाओं में निवेश करने वालों को जल्द ही खुशखबरी मिल सकती है। सरकार इस महीने के अंत में अगली तिमाही के लिए इन योजनाओं पर ब्याज दरें तय करेगी। इससे पीपीएफ, सुकन्या समृद्धि योजना, पोस्ट ऑफिस आरडी, महिला समृद्धि बचत प्रमाणपत्र, किसान विकास पत्र, राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र और वरिष्ठ नागरिक बचत योजना जैसी स्कीम्स के इंटरेस्ट रेट में बदलाव हो सकता है।
इन योजनाओं की ब्याज दरें सरकार हर तिमाही के लिए तय करती है। नए इंटरेस्ट रेट्स जुलाई से सितंबर 2024 तक लागू रहेंगे। अब सवाल यह है कि क्या मोदी 3.0 सरकार इन स्माल सेविंग्स स्कीम्स की ब्याज दरें बढ़ाएगी? अप्रैल-जून तिमाही में नहीं हुआ था कोई बदलाव सरकार ने अप्रैल-जून तिमाही में इन योजनाओं की ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखा। अगर ब्याज दर बढ़ती है तो यह घरेलू बचत को प्रोत्साहित करने का संकेत होगा, जो पिछले कुछ सालों से सुस्त चल रही है। हालांकि सरकार यह भी देखेगी कि उसके पास अधिक ब्याज भुगतान को मैनेज करने की कितनी क्षमता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक वैश्विक स्थिति को भी देखना होगा। क्योंकि ज्यादातर देशों में अभी भी जमा पर ब्याज दरें अपेक्षाकृत कम हैं। यदि भारत ब्याज दरों में उल्लेखनीय वृद्धि करता है, तो इससे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश को नुकसान हो सकता है। व्यापक आर्थिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार राजकोष पर अनावश्यक दबाव डाले बिना बचत को बढ़ावा देने के लिए दीर्घकालिक निवेश पर दरों को समायोजित कर सकती है। पीएफ, ईएसएएफ और लघु बचत योजनाएं सरकार के लिए संवेदनशील राजनीतिक मुद्दे हैं। जहां लाखों लघु बचतकर्ताओं को लाभ पहुंचाने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव है। विशेषकर महंगाई के युग में। साथ ही, सरकार को इन निर्णयों को व्यापक आर्थिक परिदृश्य के अनुसार देखना होगा। इसमें आरबीआई की मौद्रिक नीति और बैंकों की जमा दरें भी शामिल हैं।

