अगर आपको इनकम टैक्स का नोटिस मिल जाए तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है. कई बार समय पर आईटीआर फाइल करने के बावजूद भी इनकम टैक्स का नोटिस मिल सकता है. आईटीआर भरते समय कैलकुलेशन में गलती, इनकम को सही तरीके से न भरना या फिर अत्यधिक नुकसान दिखाने जैसी वजहों से भी आपको आईटी डिपार्टमेंट का नोटिस मिल सकता है. अगर आपको भी नोटिस मिला है तो ये रिपोर्ट आपके लिए है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
एएमआरजी ऐंड असोसिएट्स के सीनियर पार्टनर रजत मोहन बताते हैं, टैक्स नोटिस को सिस्टम के टैक्स लॉजिक्स के आधार पर जारी किया जाता है. करदाता केवल तभी इस तरह के नोटिस से बच सकते हैं जब वे यह सुनिश्चित कर लें कि टैक्स रिटर्न सही तरीके से सही समय पर भरा गया हो, आईटीआर और फॉर्म एएस 26 में भरे गए इनकम के डीटेल्स एक समान हों, किसी वित्त वर्ष में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल 2 लाख रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन न हो, बैंक अकाउंट में जमा और निकासी एक सीमा के अंदर हो और आईटीआर में म्यूचुअल फंड या शेयरों को खरीदने या बेचने की जानकारी दी गई हो.
नोटिस को ठीक तरह से पढ़ लें
इनकम टैक्स का नोटिस मिलने पर उसे ठीक तरह से पढ़ लें. पढ़ लें कि आपको किस वजह से नोटिस मिला है और इस नोटिस की गंभीरता कितनी है. यह भी देख लें कि इस नोटिस पर रेस्पॉन्स करने की समयसीमा क्या है. नोटिस में दिए गए समयसीमा के भीतर आपको रेस्पॉन्स देना जरूरी होता है. ऐसा नहीं करने पर आप बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं.
आईटी डिपार्टमेंट को दें सारे डीटेल्स
अगर डिपार्टमेंट की तरफ से किसी तरह की छानबीन चल रही है तो मांगे गए सभी जरूरी डीटेल्स और डॉक्युमेंट्स मुहैया कराएं. डिपार्टमेंट द्वारा भेजे गए नोटिस का जवाब नहीं देने पर आपको इनकम टैक्स के नियमों के मुताबिक बड़ा जुर्माना भरना पड़ सकता है. इस तरह के नोटिस से बचने के लिए आपको अपना रिटर्न समय पर भरना चाहिए और अगर किसी तरह का बकाया है तो उसे भी समय रहते चुका देना चाहिए.
एक्सपर्ट की सलाह लेने से न हिचकें
अगर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस काफी गंभीर है तो किसी एक्सपर्ट की सलाह लेने से न हिचकें. आपके लिए यह ज्यादा अच्छा होगा कि आप किसी काबिल चार्टेड अकाउंटेंड को हायर कर लें. हालांकि अगर आप चाहें तो खुद भी अपना केस हैंडल कर सकते हैं. इसके लिए जरूरी है कि आईटीआर भरते समय आप सभी डीटेल्स और फॉर्म अपने पास जरूर सेव करके रख लें.

