नई दिल्ली: आलू की महंगाई ने पिछले 10 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर में आलू 39.30 रुपये प्रति किलो के भाव से बिका जो पिछले 130 महीनों में सबसे अधिक है. हालांकि दिल्ली में आलू इससे भी महंगा बिका. दिल्ली में आलू इस दौरान 40.11 रुपये प्रति किलो के भाव से बिका जो जनवरी 2010 के बाद से सबसे अधिक है. यह आंकड़ा मिनिस्ट्री ऑफ कंज्यूमर्स अफेयर्स, फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन का है. आलू के अलावा प्याज के भाव भी तेजी से बढ़ें हैं. इन दोनों के भाव को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने इनके आयात का फैसला लिया है.
पिछले साल की बात करें तो आलू 2019 में 20.57 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रहा था यह इस साल की तुलना में आधे पर है. दिल्ली की बात करें तो पिछले साल यह 25 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिका था. पिछले एक साल में दिल्ली में आलू 60 फीसदी महंगा हुआ है. मिनिस्ट्री के पोर्टल पर जनवरी 2010 से आंकड़े उपलब्ध हैं.
आलू की रिटेल प्राइस आमतौर पर सितंबर से नवंबर के बीच अधिक रहती हैं लेकिन इस साल यह फरवरी से मार्च से ही महंगा होना शुरू हो गया. उस समय 23 रुपये प्रति किलो की दर आलू की रिटेल प्राइस पहुंच गई थी. आलू की खुदरा कीमतें अधिक होने की एक वजह यह है कि पिछले साल की तुलना में इस बार इसका स्टोरेज कम हुआ है. देश भर के स्टोरेज में इस बार 36 करोड़ बैग (हर बैग 50 किलो का) का भंडारण हुआ था जबकि पिछले साल 48 करोड़ बैग और उसके पिछले साल 2018 में 57 करोड़ बैग का भंडारण हुआ था. मिनिस्ट्री ऑफ एग्रीकल्चर एंड फार्मर्स वेलफेयर के आंकड़ों के मुताबिक इस बार 214.25 लाख टन आलू कोल्ड स्टोरेज में रखा गया था जबकि पिछले साल 2018-19 में 238.50 लाख आलू कोल्ड स्टोरेज में था. कृषि मंत्रालय ने कम स्टोरेज को लेकर आशंका जताई थी कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद आलू की कीमत बढ़ सकती है. भारत ने इस साल अप्रैल से अगस्त के बीच नेपाल, ओमान, सऊदी अरब और मलेशिया को 1.23 लाख टन आलू निर्यात किया था.

