नई दिल्ली: कोरोना काल में रिजर्व बैंक के आदेश पर लोन मोराटोरियम पीरियड की घोषणा की गई थी। पहले इसे मार्च से मई महीने तक लागू किया गया और बाद में इसे अगस्त तक बढ़ा दिया गया। यह अवधि 31 अगस्त (मार्च से अगस्त छह महीने के लिए) को समाप्त हो रही है। वर्तमान हालात के मद्देनजर रिजर्व बैंक ने मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी की बैठक में लोन री-स्ट्रक्चरिंग (कर्ज पुनर्गठन) की घोषणा की थी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण तीन सितंबर को बैंकों और NBFC के प्रमुखों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा के लिए बैठक करने जा रही हैं। उनकी इस बैठक का मकसद योजना का सुचारू और तेजी से क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘समीक्षा के दौरान इस बात पर गौर किया जाएगा कि आखिरकार किस तरह से कारोबारियों और लोगों को इसका लाभ दिया जाए। समीक्षा के दौरान विभिन्न आवश्यक कदमों जैसे कि बैंक नीतियों को अंतिम रूप देने और कर्जदारों की पहचान करने के साथ-साथ उन मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी जिन्हें सुचारू एवं शीघ्र कार्यान्वयन के लिए सुलझाना अत्यंत आवश्यक है।’

