नई दिल्ली: कोरोना संकट ने लोगों के बचत और निवेश की गणित भी खराब कर दी है. इक्विटी मार्केट हो या म्यूचुअल फंड दोनों में ही निवेशको को अचछा खासा नुकसान उठाना पड़ा, जिससे कुछ लोगों ने अपने निवेश को बेच दिया या रोक दिया. इनमें म्यूचुअल फंड एसआईपी भी शामिल है. एसोसिएशन आफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक इस वित्त वर्ष अप्रैल से लेकर अगस्त तक कुल 40.5 लाख लोग ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी एसआईपी बंद कर दी है. यह पिछले साल के मुकाबले करीब 7 लाख ज्यादा है. हो सकता है आप भी इन्हीं में शामिल हों. अगर आपने ऐसा किसी परेशानी के चलते किया तो अब क्या करना चाहिए…
कोरोना संकट के दौरान बहुत से लोगों की मंथली होने वाली इनकम कम हो गई या बंद हो गई. प्राइवेट कंपनियों में जहां लोगों को सैलरी कट से जूझना पड़ा, वहीं नॉन सैलरीड की आमदनी काम धंधे बंद होने से कम हो गई. ऐसे में मजबूतरी में उन्हें अपना एसआईपी निवेश रोकना पड़ा.
बहुत से लोग ऐसे हैं जिन्होंने कोरोना संकट में गिरते हुए बाजार को देखकर डर की वजह से निवेश बंद कर दिया. लेकिन उन्होंने अच्छा यह किया कि पैसा नहीं निकाला है.
बहुत से लोग ऐसे होंगे जिन्होंने पैनिक में बंद तो किया होगा, वहीं गलती से पैसा भी निकाल लिया होगा.

