मुंबई: वोडाफोन आइडिया ने सरकार से 15 वर्षों में AGR की बकाया रकम चुकाने की अनुमति देने का निवेदन किया है। इसके साथ ही कंपनी ने टैक्स रिफंड, लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज (SUC) में कमी और टैरिफ की न्यूनतम लिमिट तय करने की भी मांग की है।
टेलिकॉम डिपार्टमेंट (DoT), वित्त मंत्रालय और नीति आयोग को लिखे पत्र में कंपनी ने कहा है कि उसे बिजनस में बने रहने के लिए सरकार से मदद की जरूरत है। यह पत्र टेलिकॉम डिपार्टमेंट की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था डिजिटल कम्युनिकेशंस कमीशन (DCC) की मीटिंग से एक दिन पहले भेजा गया है। DCC वित्तीय मुश्किलों का सामना कर रही वोडाफोन आइडिया जैसी कंपनियों को राहत देने पर विचार कर सकता है।
वोडाफोन आइडिया ने पत्र में 8,000 करोड़ रुपये के गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (GST) रिफंड की मांग की है। इस रकम को उसके AGR के बकाया के बदले अजस्ट किया जा सकता है। कंपनी चाहती है कि उसे बाकी बकाया रकम 15 वर्षों की अवधि में चुकाने की अनुमति दी जाए।
वोडाफोन आइडिया के पास 30 करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर्स हैं। कंपनी को AGR की बकाया रकम के तौर पर सरकार को लगभग 57,000 करोड़ रुपये चुकाने हैं। इसमें से अभी तक उसने केवल 3,500 करोड़ रुपये दिए हैं। हालांकि, वोडाफोन आइडिया के आकलन के अनुसार उसकी बकाया रकम लगभग 23,000 करोड़ रुपये है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि वोडाफोन आइडिया के लिए इस रकम का इंतजाम करना बहुत मुश्किल है। वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्युलर के मर्जर के बाद बनी वोडाफोन आइडिया ने AGR की बकाया रकम पर राहत न मिलने की स्थिति में बिजनस से बाहर निकलने की चेतावनी दी है।
कंपनी की ओर से लिखे गए पत्र में लाइसेंस फीस और SUC में कमी करने का भी निवेदन किया गया है। टेलिकॉम कंपनियां अपने AGR का 8 पर्सेंट लाइसेंस फीस के तौर पर सालाना चुकाती हैं। ईटी ने रिपोर्ट दी थी कि वित्तीय मुश्किलों का सामना कर रही टेलिकॉम कंपनियों की मदद के लिए सरकार लाइसेंस फीस और SUC का भुगतान टालने पर विचार कर रही है।

