नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मान्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए तीन बड़ी योजनाओं को मंजूरी दी, जिनमें 48 हजार करोड़ रुपये का प्रोत्साहन पैकेज शामिल है। इससे मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में चीन और वियतनाम को मात देने में मदद मिलेगी। केंद्रीय दूरसंचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने शनिवार को इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि सरकार को इन योजनाओं से 2025 तक 10 लाख करोड़ रुपये का मैन्युफैक्चरिंग रेवेन्यू और रोजगार के 20 लाख अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
मंत्रिमंडल ने देश में चिकित्सा में इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए मेडिकल इक्विपमेंट्स के आयात पर प्रोत्साहन को भी मंजूरी दी। प्रसाद ने बताया कि सरकार इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए पांच साल में 40,995 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन देगी। उन्होंने कहा कि योजना के तहत पूंजीगत निवेश पर 25 पर्सेंट का प्रोत्साहन दिया जाएगा।
प्रसाद ने कहा, ‘भारत को नई दिशाओं तथा चिकित्सकीय इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का बड़ा केंद्र बनाने के लिए दो दीर्घकालिक नीतिगत निर्णय लिए गए हैं। मंत्रिमंडल ने इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण कंपनियों के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन को मंजूरी दी है। हम इस क्षेत्र में उत्पादन आधारित प्रोत्साहन के तहत अगले पांच साल के दौरान 40,995 करोड़ रुपये उपलब्ध कराएंगे।’ उन्होंने कहा कि प्रोत्साहन कंपनियों की बिक्री में वृद्धि तथा पूंजीगत निवेश से जुड़ा होगा। उन्होंने कहा, ‘हम इन योजनाओं के दम पर 2025 तक 10 लाख करोड़ रुपये का विनिर्माण राजस्व की उम्मीद कर रहे हैं।’
प्रसाद ने कहा कि योजना के तहत पूंजीगत निवेश पर 25 फीसदी का प्रोत्साहन दिया जाएगा। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि योजना का लक्ष्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना तथा मोबाइल फोन विनिर्माण और असेंबली टेस्टिंग, मार्किंग ऐंड पैकेजिंग (एटीएमपी) इकाइयों समेत विशिष्ट इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जों के विनिर्माण में निवेश आकर्षित करना है। मंत्रालय ने कहा, ‘योजना के तहत तय क्षेत्रों में पात्र कंपनियों को आधार वर्ष की तुलना में बिक्री में हुई वृद्धि पर चार से छह पर्सेंट का प्रोत्साहन मिलेगा। यह प्रोत्साहन आधार वर्ष से अगले पांच साल तक मिलेगा। इस योजना के तहत मोबाइल फोन के घरेलू मूल्य वर्धन के 2025 तक बढ़कर 35 से 40 प्रतिशत हो जाने का अनुमान है, जो अभी दो से 25 फीसदी तक है।’

