मुंबई: टैक्स से जुड़े विवादों के सेटलमेंट के लिए ‘विवाद से विश्वास’ स्कीम सरकार ने पेश की थी मगर सरकारी बैंक और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां इस स्कीम को चुनने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही हैं । बताया जा रहा है कि टैक्स के बड़े मामलों से जुड़ी लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ने एक स्पेशल कमिटी बनाई है, जो यह तय करेगी कि इस आंशिक ऐमनेस्टी स्कीम का सहारा लिया जाए या नहीं।
सूत्र बताते हैं कि फील्ड ऑफिसर्स ने SBI, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से संपर्क किया था ताकि इस स्कीम के तहत टैक्स विवाद हल सेटल किए जाएं। हालांकि बैंक अधिकारियों ने ईटी को बताया कि अधिकतर मामलों में टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से लगाए गए टैक्स का ठोस आधार ही नहीं है। उन्होंने कहा कि वे केस टु केस बेसिस पर तय करेंगे कि इस स्कीम का सहारा लिया जाए या नहीं।
बैंकों के अलावा टैक्स अधिकारियों ने एअर इंडिया, इंडियन ऑयल कॉर्प, महानगर गैस, एलआईसी, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन सहित सरकारी कंपनियों से भी संपर्क किया था। इस लिस्ट में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन, जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन और न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन भी शामिल हैं। महाराष्ट्र की सरकारी कंपनियों महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड, महाराष्ट्र हाउसिंग ऐंड एरिया डिवेलपमेंट अथॉरिटी, महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डिवेलपमेंट कॉरपोरेशन ऐंड स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी से भी संपर्क किया गया था।
सूत्रों ने बताया कि LIC के मामले में विभिन्न फोरम्स पर मुकदमे के तहत 50000 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम है। LIC ने ईटी के सवालों के जवाब नहीं दिए। SBI के मामले में 30000 करोड़ रुपये से अधिक रकम मुकदमेबाजी में फंसी है।
CBDT ने 21 फरवरी के सर्कुलर में कहा था, ‘विवाद से विश्वास स्कीम के संबंध में फील्ड ऑफिसर्स के प्रदर्शन के आकलन के लिए टारगेट यह तय किया गया है कि इस स्कीम की पात्रता के दायरे में आने वाले विवादित टैक्स डिमांड के सभी मामलों का निपटारा हो जाए।’ इससे पहले एक अन्य सर्कुलर में CBDT ने कहा था कि फील्ड ऑफिसर्स के ‘ऐनुअल परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट्स को फाइनल किए जाने में विवाद से विश्वास स्कीम को एक अहम पहलू माना जाएगा और भविष्य में उनकी पोस्टिंग में यह एक महत्वपूर्ण फैक्टर होगा।’

