चालू वित्त वर्ष 2024-2025 की पहली तिमाही के दौरान सबसे ज्यादा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित करने में महाराष्ट्र ने बाज़ी मारी है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के अनुसार, अप्रैल से जून 2024-25 की पहली तिमाही में 70,795 करोड़ रुपये का एफडीआई प्राप्त करने के साथ ही महाराष्ट्र अन्य राज्यों में पहले स्थान पर बना हुआ है। वहीँ पड़ोसी राज्य कर्नाटक 19,059 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने के मामले में दूसरे स्थान पर रहा।
दिल्ली 10,788 करोड़ रुपये के साथ तीसरे, तेलंगाना 9,023 करोड़ रुपये के साथ चौथे और गुजरात 8,508 करोड़ रुपये के साथ पांचवें स्थान पर रहा। वहीँ तमिलनाडु 5,818 करोड़ रुपये के साथ छठे, उत्तर प्रदेश 370 करोड़ रुपये के साथ आठवें और राजस्थान 311 करोड़ रुपये के साथ नौवें स्थान पर रहा। उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को कहा कि महाराष्ट्र ने 2022-23 में 1,18,422 करोड़ रुपये का एफडीआई आकर्षित किया है, जो कर्नाटक, दिल्ली और गुजरात के संयुक्त से भी अधिक है।
डीपीआईआईटी के आंकड़े महायुति सरकार के लिए बड़ी राहत लेकर आए हैं, खासकर तब जब महा विकास अघाड़ी गुजरात और अन्य राज्यों में पूंजी और निवेश के पलायन को लेकर सरकार पर अपना हमला तेज कर रहा है। एमवीए की आलोचना का कारण 1.80 लाख करोड़ रुपये की वेदांता-फॉक्सकॉन परियोजना, टाटा एयरबस विनिर्माण संयंत्र, गेल की मध्य प्रदेश के सीहोर में 1.5 मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता वाली इथेन क्रैकिंग यूनिट का दूसरे राज्यों को दिया जाना था।

