स्टेट बैंक ने ओवरसीज बांड से जुटाए 4391 करोड़ रुपये

SBI's profits increase, NPA decreased

नई दिल्ली: भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपने लंदन ब्रांच के जरिए 1.8 फीसदी कूपन रेट पर रेगुलेशन एस बांड से 60 करोड़ डॉलर (4,391 करोड़ रुपये) जुटाए हैं. बांड को 5 साल के ट्रेजरी बांड के अगेन्स्ट बेंचमार्क किया गया है और इसकी प्राइस 1.40 फीसदी के स्प्रेड पर निर्धारित की गई है. यह बांड एसजीएक्स-एसटी (सिंगापुर एक्सचेंज- सिक्योरिटी ट्रेडिंग) और इंडिया आईएनएक्स (इंडिया इंटरनेशनल एक्सचेंज) पर लिस्टेड किया जाएगा. एसबीआई ने इसके जरिए करीब दो साल के बाद इंटरनेशनल पब्लिक बांड मार्केट्स में वापसी की है. कोरोना महामारी की शुरुआत के बाद से किसी भारतीय शेड्यूल्ड कॉमर्शियल बैंक द्वारा यह पहला पब्लिक यूएसडी बांड इश्यू किया गया है.

एसबीआई के इस ऑफर को दुनिया भर से बेहतर रिस्पांस मिला. इसकी मांग इतनी रही कि 210 करोड़ डॉलर (15.4 हजार करोड़) के ऑर्डर बुक हुए. इस मांग के कारण इसकी प्राइस में 35 बीपीएस की कमी, टी+175 बीपीएस से टी+बीपीएस, की गई यानी कि किसी भारतीय इशूअर के द्वारा 5.5 साल के लिए यह सबसे कम कूपन पर इशू करने की उपलब्धि एसबीआई को मिली. अनुमान लगाया जा रहा है मूडीज से इसे बीएएए3, स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (S&P) से बीबीबी माइनस और फिच से बीबीबी माइनस की रेटिंग मिल सकती है. एसबीआई के डिप्टी एमडी (इंटरनेशनल बैंकिंग ग्रुप) सी वेंकट नागेश्वर ने कहा कि हाई वोलैटिलिटी के इस माहौल में भी दुनिया भर के फिक्स्ड इनकम वाले निवेशकों से फंड जुटाए हैं जिससे भारतीय बैंकिंग सेक्टर में वैश्विक निवेशकों का भरोसा साबित होता है. नागेश्वर के मुताबिक इससे वैश्विक निवेशकों का भरोसा एसबीआई में दिखता है.

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