बाइक और ऑटो के लिए मशहूर रैपिडो ने 5 दिसंबर को कैब बिजनेस में उतरने की घोषणा की। राइड सेवाएं देने वाली दिग्गज कंपनी रैपिडो जल्द ही यूनिकॉर्न यानी अरबों डॉलर की कंपनी बनने जा रही है। इस स्टार्टअप के सह-संस्थापक और सीईओ पवन गुंटुपल्ली के मुताबिक रैपिडो ऑपरेशनल तौर पर मुनाफे में है और जल्द ही इसका EBITDA मार्जिन भी मुनाफे में आ जाएगा. ऐसे में उन्होंने भरोसा जताया है कि आने वाले महीनों में यह यूनिकॉर्न बन जाएगा.
बता दें कि रैपिडो कैब सेवाएं सबसे पहले दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद से शुरू की गई हैं। जल्द ही इसका विस्तार देश अन्य राज्यों में भी जल्द किया जाएगा। फिलहाल रैपिडो का लक्ष्य अपने प्लेटफॉर्म पर 1 लाख कैब लाने का है। इस सेगमेंट की दिग्गज कंपनियों ओला और उबर से मुकाबले के बारे में पवन गुंटुपल्ली का कहना है कि इस समय राइड सेवाएं देने वाली ऐप इंडस्ट्री को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। राइड की कीमतें बढ़ रही हैं और ड्राइवरों की कमाई घट रही है जो सकारात्मक संकेत बिलकुल नहीं है। रैपिडो के संस्थापक के मुताबिक मौजूदा बिजनेस मॉडल इस समस्या की जड़ हो सकता है।
वहीँ अगर हम रैपिडो कैब्स के कारोबारी मॉडल की बात करें तो इसने ख़ास तरह का SaaS आधारित मॉडल लांच किया है. ये एक जीरो कमीशन पारदर्शी मॉडल है जिसमें किसी तरह की कोई हिडेन प्राइस नहीं है. रैपिडो सीईओ ने उम्मीद जताई कि जो ड्राइवर समस्याओं के चलते ओला या ऊबर से किनारा कर चुके हैं वो रैपिडो को प्लेटफॉर्म ज्वाइन करेंगे। उनके मुताबिक बाकी कम्पनिया ड्राइवर्स पार्टनर्स से कमीशन लेती है मगर रैपिडो सब्सक्रिप्शन फीस लेगी।

