कोरोना वायरस के बढ़ रहे मामलों के बीच कारखानों में काम काज प्रभावित हो रहा है. मार्च में मैन्युफैक्चरिंग PMI (परचेज मैनेजर इंडेक्स) 7 महीने के लो पर रही है. मार्च में यह 55.4 रही है, जबकि फरवरी में PMI 57.5 था. IHS मार्किट के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में कारखानों में होने वाला प्रोडक्शन 7 महीनों में सबसे निचले लेवल पर आ गया है. यानी देशभर में अलग-अलग जगह पर पाबंदियां लगने का असर फैक्टरी आउटपुट पर साफ नजर आने लगा है.
बता दें कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर देश में खतरनाक होती जा रही है. इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि बीते 24 घंटों में कोरोना वायरस के 1 लाख से ज्यादा मामले सामने आए हैं. यह अबतक देश में सबसे ज्यादा 1 दिन की बढ़ोत्तरी है. कोरोना वायरस की दूसरी लहर मार्च से ही शुरू हो गई थी, जिसका असर पीएमआई पर देखने को मिला है. माना जा रहा है कि अप्रैल में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में और कमी आ सकती है क्योंकि अब सख्ती और बढ़ रही है.
आईएचएस मार्किट की इकनामिक्स एसोसिएट डायरेक्टर पॉलिना डी लिमा ने कहा कि साल 2021 की शुरुआत से पीएमआई में तेजी देखी गई थी. साल 2020 का अंत कमजोरी के साथ ही हुआ था. अगर बात मार्च की करें तो इसमें मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ग्रोथ मोमेंटम कम होता हुआ नजर आ रहा है. परचेसिंग मैनेजर इंडेक्स से संबंधित आंकड़े एक सर्वे के माध्यम से जुटाए जाते हैं. डी लिमा ने कहा कि सर्वे में शामिल कंपनियों ने कोरोनावायरस महामारी के दोबारा सिर उठाने की वजह से मांग की ग्रोथ में कमजोरी आने की बात कही है.

