नई दिल्ली: केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमाशुल्क बोर्ड (CBIC) ने बिजनेस-टू-बिजनेस (बी2बी) लेनदेन पर 1 अक्टूबर से इलेक्ट्रानिक बिल (ई-इनवॉइस) बनाने के मामले में एकबारगी राहत दी है. वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) कानून के तहत 500 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए एक अक्टूबर से बी2बी लेनदेन पर ई-इनवॉइस बनाना अनिवार्य किया गया था.
CBIC ने एक बयान में कहा है कि इस संबंध में पहली अधिसूचना जारी करने के नौ महीने बाद भी कुछ कारोबार अभी तक इसके लिए तैयार नहीं हुए. इसलिए ई-इनवॉइस प्रणाली को लागू करने के शुरुआती चरण में आखिरी मौका देते हुए यह निर्णय किया गया है कि ऐसे करदाताओं द्वारा अक्टूबर 2020 के दौरान निर्धारित तौर तरीके का पालन करे बिना भी जारी किए जाने वाले इनवॉयस को मान्यता दी जानी चाहिए और नियमों का पालन नहीं करने के चलते उन पर जुर्माना लगाया जाना चाहिए.
हालांकि करदाताओं को जुर्माने से एक शर्त पर छूट मिल सकती है, वह यह कि बी2बी सौदों की अक्टूबर महीने में की गयी बिक्री के लिए एक माह के भीतर ई-इनवॉयस बनाने होंगे. इसके लिये इनवॉइस रेफ्रेंरेंस पोर्टल (आईआरपी) से उसका रेफरेंस नंबर प्राप्त करना होगा.

