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    Home»क्रेडिट कार्ड»‘नो कॉस्ट ईएमआई’ का ऑफर स्वीकारने से पहले बारीकियां समझना ज़रूरी
    क्रेडिट कार्ड

    ‘नो कॉस्ट ईएमआई’ का ऑफर स्वीकारने से पहले बारीकियां समझना ज़रूरी

    News DeskBy News DeskDecember 9, 2023No Comments3 Mins Read
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    आम तौर पर यह बात सभी लोगों को मालूम है कि क्रेडिट कार्ड की बकाया रकम को देय तारीख तक पूरी तरह नहीं चुकाया गया तो आपको काफी भारी-भरकम ब्याज देना पड़ सकता है. कई बार तो यह ब्याज सालाना 42 फीसदी तक भी हो सकता है. कई बार लेट पेमेंट पेनाल्टी के तौर पर भी मोटी रकम आपको देनी पड़ सकती है. ऐसे में अगर आपने क्रेडिट कार्ड के माध्यम से कोई बड़ी खरीदारी की है और आपके लिए देय तारीख तक पूरी रकम चुकाने में समस्या आ रही है तो पूरे पेमेंट को EMI में बदलने का उपाय भी होता है. इस तरह कि ईएमआई पर लगने वाला ब्याज उस इंटरेस्ट के मुकाबले कम होता है जो आपको पूरी रकम न भरने पर देना पड़ता है. लेकिन इन सबके अलावा एकबात बहुत कम लोग जानते हैं कि क्रेडिट कार्ड की ईएमआई में बताए गए ब्याज के अलावा 18% एक्स्ट्रा कॉस्ट भी जुड़ी होती है!

    बड़ा क्रेडिट होने पर क्रेडिट कार्ड कम्पनीज कई बार आपको ‘नो कॉस्ट ईएमआई’ का ऑफर पेश करती हैं जो सुनने में बड़ी लुभावनी होती है और धारक उसकी तरफ आसानी से आकर्षित हो जाता है, ऐसे लोग ‘नो कॉस्ट ईएमआई’ का मतलब ये समझते हैं कि आपको सिर्फ उतने ही पैसे देने हैं जितने की आपने परचेजिंग की है, कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं. लेकिन ऐसा होता नहीं है. बता दें कि ‘नो कॉस्ट ईएमआई’ की भी एक लागत होती है. इसलिए ‘नो कॉस्ट ईएमआई’ का ऑफर स्वीकारने से पहले आपको इसकी बारीकियां समझना ज़रूरी है वरना शॉक लगने का खतरा है.

    आपको ये मालूम होना चाहिए कि क्रेडिट कार्ड की बकाया रकम पर लगने वाले ब्याज पर भी आपको GST देना पड़ सकता है. बता दें कि वित्तीय संस्थानों की बहुत सारी सर्विसेज और चार्जेज GST के दायरे में आती हैं जो ग्राहकों से ही वसूला जाता है. क्रेडिट कार्ड पर लगने वाला ब्याज भी इसी दायरे में शामिल है, यह जीएसटी क्रेडिट कार्ड लेनदेन के ब्याज पर लगता है. तो स्वाभाविक है कि अगर आपने क्रेडिट कार्ड से किए खर्च को नो कॉस्ट ईएमआई में तब्दील किया तो बिल आने पर ब्याज के ऊपर 18 फीसदी जीएसटी भी जुड़ेगा. अगर आप EMI के लिए 25 फीसदी ब्याज दे रहे हैं तो उस पर 18 फीसदी जीएसटी जोड़ने के बाद ब्याज की पूरी लागत बढ़ जाएगी.

    अब सवाल ये है कि अगर नो कॉस्ट ईएमआई है तो उस पर GST क्यों? दरअसल क्रेडिट कार्ड जारी करने वाला बैंक तो अपना ब्याज लेता है लेकिन सामान बेचने वाला रिटेलर आपको इंस्टैंट डिस्काउंट के रूप में जो ऑफर देता है वो आपकी EMI की पूरी अवधि के दौरान वसूले जाने वाले ब्याज के बराबर रकम होती है. इसलिए रिटेलर दावा करता है कि आपके लिए इस EMI की कोई लागत नहीं है या ये नो कॉस्ट ईएमआई है. लेकिन आपको जो ड्सकॉऊंट ऑफर किया जा रहा है उसमें आमतौर पर सिर्फ ईएमआई का ब्याज शामिल होता है, उस ब्याज पर सरकार की तरफ से वसूला जाने वाला जीएसटी नहीं।

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