नई दिल्ली: पूरी दुनिया में फैल रहे जानलेवा कोरोना वायरस के प्रकोप को लेकर भारत बेहद सतर्क हो गया है। देश में दवाओं की किल्लत नहीं हो, यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार एंटीबायोटिक्स, विटामिन्स और हॉर्मोन सहित लगभग 12 दवाओं के निर्यात पर बैन लगा सकती है।
इस कदम का मकसद भारत में जरूरी दवाओं की उपलब्धता बरकरार रखना है। चीन के हुबेई प्रांत में कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा प्रकोप है और इसी प्रांत से भारतीय दवा उद्योग सर्वाधिक कच्चा माल या ऐक्टिव फार्मास्यूटिकल इनग्रेडियंट (API) का आयात करता है। हालांकि, फिलहाल देश में दवाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन हुबेई प्रांत को अगर फरवरी के बाद भी बंद रखा गया तो परेशानी पैदा हो सकती है।
देश में दवाओं की उपलब्धता का आकलन करने के लिए गठित आठ सदस्यों वाली एक्सपर्ट कमिटी ने क्लोरमफेनिकॉल, नियोमाइसिन, मेट्रोनिडाजोल, एजिथ्रोमाइसिन, क्लिंडामाइसिन, विटामिन B1, B2 तथा B6 सहित 12 दवाओं के साथ प्रॉजेस्ट्रॉन हॉर्मोन के निर्यात पर बैन लगाने की सिफारिश की है। प्रोजेस्ट्रॉन का इस्तमेमाल गर्भवास्था तथा माहवारी से जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है।
इसके अलावा, पैनल ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह राज्य सरकारों को आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने और जमाखोरी तथा किसी भी तरह की कृत्रिम कमी पैदा करने के खिलाफ कड़ी निगरानी करने को कहे।
पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि व्यापारी मौके का किसी तरह से फायदा नहीं उठाएं और एपीआई या मेडिसिन फॉर्म्यूलेशंस की कीमतों में इजाफा नहीं करें, यह सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारें कदम उठाएं।
एक्सपर्ट कमिटी में शामिल एक अधिकारी ने कहा, ‘हमने अंतिम रिपोर्ट तैयार कर ली है और मंगलवार को उसे सरकार को सौंप देंगे।’ बता दें कि भारत दवाओं का 80-85% कच्चा माल चीन से आयात करता है।

