नई दिल्ली: भारत पर अभी कोरोनावायरस के शुरुआती चरण का ही कहर बरपा है, लेकिन उद्योग जगत पर इसका गंभीर असर पड़ना शुरू हो गया है। देश के सबसे बड़े उद्योग संगठन फिक्की के एक सर्वेक्षण में यह सामने आया है कि 73 फीसदी उद्योगपतियों की ऑर्डर बुक में कमी आई है। 53 फीसदी उद्योगपतियों का तो कहना है कि उनकी ऑर्डर बुक में तो 20 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ गई है जबकि 8 फीसदी ने कहा है कि उनका ऑर्डर बुक बढ़ी है। फिक्की के सदस्यों और उद्योग मंडलों के बीच बीते 15 से 19 मार्च के बीच कराए गए इस सर्वे में 317 कंपनियों ने भाग लिया है।
सर्वे में बताया गया है कि उद्योगपतियों के उत्पादन इकाइयों में इन्वेंट्री का स्तर बढ़ रहा है। इसमें शामिल 35 फीसदी उद्योगपतियों का कहना है कि जिस हिसाब से उत्पादन हो रहा है, उस हिसाब से माल बाहर नहीं जा रहा है, इसलिए इन्वेंट्री का लेवल बढ़ रहा है। इनमें से 50 फीसदी उद्योगपतियों का तो कहना है कि उनका इन्वेंट्री स्तर 15 फीसदी या इससे भी ज्यादा बढ़ा है।
कोरोनावायरस की चपेट में अर्थव्यवस्था के फंसने से उद्योग जगत का कैश फ्लो घट गया है। इस सर्वे में शामिल 81 फीसदी उद्योगपतियों ने कहा कि अब उस हिसाब से कैश इन्फ्लो नहीं हो रहा है, जैसे पहले होता था। इनमें से 40 फीसदी उद्योगपतियों ने बताया कि उनका कैशफ्लो 20 फीसदी या उससे ज्यादा घटा है।
इस महामारी के असर से उद्योग जगत का सप्लाई चेन बुरी तरह से प्रभावित हुई है। सर्वे में शामिल 60 फीसदी से भी ज्यादा उद्योगपतियों ने कहा कि उनके आपूर्ति तंत्र पर असर पड़ा है। इनमें से 47 फीसदी उद्योगपतियों का कहना था कि बीते चार सप्ताह से कम से समय से उनकी आपूर्ति प्रभावित हुई है जबकि 31 फीसदी का कहना था कि एक-डेढ़ महीने से उनकी आपूर्ति श्रृंखला टूटी हुई है। इनमें से 6.76 फीसदी उद्योगपतियों का कहना था कि दो महीने से ज्यादा वक्त से उनका आपूर्ति तंत्र गड़बड़ है।

