नई दिल्ली: कोरोना महामारी के कारण अर्थव्यवस्था में आई गिरावट में उम्मीद के विपरीत अधिक तेजी से रिकवरी हो रही है. इस तरह से इकोनॉमिक ग्रोथ चालू वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही में पॉजिटिव जोन में आ जाएगा. हालांकि यह ग्रोथ 0.1 फीसदी ही रहेगी लेकिन पॉजिटिव ग्रोथ उत्साहजनक है. यह संभावना केंद्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के एक ऑर्टिकल ‘स्टेट ऑफ इकोनॉमी’ में दर्शाया गया है.
आरबीआई बुलेटिन के मुताबिक इकोनॉमिक रिकवरी के उम्मीद से अधिक रिकवरी के कई संकेत दिख रहे हैं. बुलेटिन में ‘स्टेट ऑफ इकोनॉमी’ ऑर्टिकल आरबीआई के ऑफिशियल्स द्वारा लिखा गया है. ऑर्टिकल में स्पष्ट कर दिया गया है कि ये लेखक के अपने विचार हैं और इसे आरबीआई का विचार नहीं समझा जाना चाहिए.
कोरोना महामारी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को बहुत बुरी तरह से प्रभावित किया था. चालू वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में जीडीपी में 23.9 फीसदी की दर से सिकुड़न रही जबकि दूसरी तिमाही में इकोनॉमिक रिकवरी की कोशिशों का प्रभाव दिखा और इकोनॉमी में 7.5 फीसदी की दर से सिकुड़न रही. आरबीआई बुलेटिन के मुताबिक तीसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ पॉजिटिव हो जाएगी. हालांकि यह बहुत मामूली लगभग 0.1 फीसदी की ग्रोथ रहेगी लेकिन इकोनॉमिक रिकवरी पॉजिटिव ग्रोथ उत्साहजनक है.
आरबीआई बुलेटिन के मुताबिक जीडीपी ग्रोथ को बढ़ाने के पीछे दो कारकों की भूमिका सबसे अधिक महत्वपूर्ण रही. सितंबर के मध्य से कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी आई है और अब इंवेस्टमेंट और कंजम्प्शन डिमांड तेजी से बढ़ रहा है. इसके अलावा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के जरिए कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर से फोकस आत्मनिर्भर भारत के जरिए इंवेस्टमेंट एक्सपेंडिचर की तरफ शिफ्ट हुआ है यानी कि महामारी के समय में खपत बढ़ी थी लेकिन अब निवेश में भी तेजी आई है. आरबीआई बुलेटिन के मुताबिक लोगों के बीच कोरोना महामारी की दूसरी लहर के प्रति भय नहीं रहा, इस वजह से मैक्रोइकोनॉमिक पॉलिसीज के लिए बेहतर माहौल बना और इकोनॉमी तेजी से सामान्य हो रही है.

