नई दिल्ली। बस चार वर्ष का समय और फिर वर्ष 2023 में उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर में देश का सबसे बड़ा जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनकर तैयार हो जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, जनवरी में पीएम मोदी एयरपोर्ट के निर्माण के लिए शिलान्यास कर सकते हैं और निर्माण के पहले चरण के पूरा होते ही 2023-24 में उड़ान शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है। चार साल में यहां से हवाई सफर एक रनवे से शुरू होगा। इसके बाद यात्रियों की संख्या के मद्देनजर रने-वे का निर्माण कार्य चलता रहेगा।
यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह के मुताबिक, एयरपोर्ट का पहला चरण 2023-24 में पूरा होगा। यात्रियों की संख्या के हिसाब से एयरपोर्ट के निर्माण को चार हिस्सों में बांटा गया है। अनुमान के मुताबिक, पहले साल करीब 1.20 करोड़ यात्रियों के सफर करने का आकलन किया गया है। इसके बाद यात्रियों की संभावित संख्या के आकलन के साथ ही निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जाएगा।
जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट एक नजर में-
2017 में नागरिक विमानन मंत्रालय द्वारा साइट क्लियरेंस
2017 में गृह मंत्रलय से अनापत्ति
2018 में रक्षा मंत्रालय से अनापत्ति
2018 में नागरिक विमानन मंत्रालय से सैद्धांतिक मंजूरी
मई 2019 में एयरपोर्ट की वैश्विक निविदा जारी
नवंबर 2019 में जेवर एयरपोर्ट की तकनीकी बिड खुली
29 नवंबर, 2019 को फाइनेंशियल बिड खोली गई
इसके निर्माण के लिये फाइनेंशियल बिड में ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी ने सबसे अधिक प्रति यात्री 400.97 रुपये की बोली लगाई। देश के सबसे बड़े एयरपोर्ट के रूप में विकसित होने जा रहे जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का निर्माण एवं संचालन स्विस कंपनी ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी करेगी।
जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट की बिड में चार कंपनियां- ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी, अडानी इंटरप्राइजेज लिमिटेड, दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड व एंकरेज इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट होल्डिंग्स लिमिटेड शामिल थीं।
ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी ने प्रदेश सरकार को प्रति यात्री 400.97 रुपये के राजस्व की बोली लगाई। अडानी इंटरप्राइजेज ने प्रति यात्री 360 रुपये, दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड ने प्रति यात्री 352 रुपये व एंकरेज इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट होलिंग्स लिमिटेड ने सबसे कम प्रति यात्री 205 रुपये की बोली लगाई। इसके साथ ही तय हो गया कि जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का निर्माण एवं संचालन ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी करेगी। पीपीपी मॉडल पर बनने वाले जेवर एयरपोर्ट का संचालन 40 साल के लिए कंपनी को मिलेगा।

