नयी दिल्ली: निजी क्षेत्र के लक्ष्मी विलास बैंक (एलवीबी) को वित्त वर्ष 2019-20 की आखिरी तिमाही में 92.86 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ है। इससे पहले फंसे कर्ज में वृद्धि के चलते बैंक को लगातार 10 तिमाहियों में घाटे का सामना करना पड़ा।
बैंक के लाभ में आने की प्रमुख वजह उसके फंसे कर्ज के लिए प्रावधान कम होना रहा। बैंक ने शुक्रवार को अपने वित्त वर्ष 2019-20 के वार्षिक और जनवरी-मार्च के तिमाही आंकड़े की जानकारी शेयर बाजार को दी।
इससे पिछले वित्त वर्ष 2018-19 की इसी तिमाही में बैंक को 264.43 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था। जबकि 2019-20 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में भी बैंक का घाटा 334.48 करोड़ रुपये रहा था। हालांकि, समीक्षाधीन अवधि में बैंक की आय घटकर 629.76 करोड़ रुपये रही। इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा 739.73 करोड़ रुपये था।
इस दौरान बैंक का सकल फंसा कर्ज (एनपीए) उसके सकल ऋण का 25.39 प्रतिशत रहा। इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 15.30 प्रतिशत था। मूल्य के आधार पर बैंक का सकल एनपीए 4,233.31 करोड़ रुपये रहा, जबकि 31 मार्च 2019 को समाप्त हुई तिमाही में यह 3,358.99 करोड़ रुपये था। इस अवधि में बैंक का शुद्ध एनपीए उसके शुद्ध ऋण का 10.04 प्रतिशत (1,387.86 करोड़ रुपये) रहा। इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह 7.49 प्रतिशत (1,506.29 करोड़ रुपये) था।

