नयी दिल्ली। लॉकडाउन के कारण लोगों की हालत खराब होती जा रही है। लोगों के पास खाने का सामान खत्म होता जा रहा है। एक ताजा सर्वे में खुलासा हुआ है कि अगले एक हफ्ते में एक-तिहाई भारतीय परिवारों के पास राशन खत्म हो जाएगा। अगर उन्हे मदद नहीं मिली तो फिर ऐसे परिवारों के सामने समस्याएं आएंगी। ये खुलासा सेंटर फॉर मॉनीटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के परिवार सर्वे में हुआ है। घरेलू इनकम पर लॉकडाउन के प्रभाव पर की गई स्टडी में पता चला है कि 84 फीसदी परिवारों की मासिक इनकम में कमी आई है, जबकि देश की एक-चौथाई से अधिक कार्यशील आबादी बेरोजगार है। रिपोर्ट का जिक्र करते हुए सीएमआईई के चीफ इकोनॉमिस्ट कौशिक कृष्णन ने कहा कि पूरे भारत में कुल परिवारों में से 34 फीसदी बिना किसी अतिरिक्त सहायता के एक सप्ताह से अधिक समय तक मौजूदा संकट का सामना नहीं कर सकते।
कृष्णन के मुताबिक ये आंकड़ें बताते हैं कि कुपोषण और खराब होती स्थिति से बचने के लिए कैश ट्रांसफर और जरूरी सामान का वितरण बहुत तेजी से किए जाने की जरूरत है। सीएमआईई के तिमाही उपभोक्ता पिरामिड घरेलू सर्वेक्षण (सीपीएचएस) सर्वे में पता चला है कि बेरोजगारी दर, जो 21 मार्च को 7.4 फीसदी थी, 5 मई को उछल कर 25.5 फीसदी पर पहुंच गई है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अंतर पर नजर डालें तो शहरी इलाकों में 65 फीसदी परिवारों के पास एक हफ्ते का पर्याप्त राशन है, जबकि ग्रामीण इलाकों में सिर्फ 54 फीसदी के पास ही एक हफ्ते का सामान है।
कुछ राज्य दूसरों की तुलना में अधिक प्रभावित हुए हैं। स्टडी में कहा गया है कि दिल्ली, पंजाब और कर्नाटक सबसे कम प्रभावित हुए हैं, लेकिन बिहार, हरियाणा और झारखंड जैसे राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। ये दर्शाता है कि लॉकडाउन से पहले प्रति व्यक्ति आय, सहायता सामग्री का पहुंचना जैसे कारक घटती इनकम के बीच काफी महत्व रखते हैं। वैसे तो केंद्र और राज्य सरकारों ने जरूरतमंदों की मदद के लिए ढेरों उपाय किए हैं, जिनमें मुफ्त राशन शामिल है, मगर इस सर्वे के अनुसार स्थिति अभी भी नियंत्रण से बाहर है।

