नई दिल्ली: देशभर में कोरोना का कहर जारी है। आज से लॉकडाउन का तीसरा चरण शुरू हो चुका है। कोरोना महामारी के कारन लॉकडाउन को अब 17 मई तक बढ़ा दिया गया। इसी बीच आपको बता दें कि कोरोना क्राइसिस के चलते भारतीय बैंकों का बैड डेट बढ़ने की उम्मीद है। मिली जानकारी के मुताबिक चार टॉप बैंकर्स ने बताया कि कोरोना वायरस महामारी की वजह से बैंकों का फंसा हुआ कर्ज दोगुना हो सकता है। भारतीय बैंक पहले ही 9.35 लाख करोड़ रुपये (123 अरब डॉलर) के एनपीए से जूझ रहे हैं। सितंबर 2019 के अंत में उनकी कुल संपत्ति का लगभग 9.1% के बराबर था।
वहीं सरकार का मानना है कि इस वित्त वर्ष के अंत तक बैंक का नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीएएस) 18-20% तक दोगुनी हो सकती है, क्योंकि बकाया लोन का 20-25% डिफ़ॉल्ट होने का जोखिम है। बैड डेट में उछाल क्रेडिट ग्रोथ और कोरोना वायरस महामारी से भारत में वसूली में देरी हो सकती है। सार्वजनिक क्षेत्र के एक शीर्ष बैंक के वित्त प्रमुख की मानें तो ये अभूतपूर्व समय है और हम उम्मीद कर रहे हैं कि बैंकों को एनपीए की दोगुनी राशि की रिपोर्ट करेंगे, जो हमने इससे पहले तिमाहियों में देखा है। भारत के वित्त मंत्रालय ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है जबकि भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय बैंक एसोसिएशन ने ई-मेल का तुरंत जवाब नहीं दिया।
कोरोनो वायरस के प्रसार पर लगाम लगाने के लिए 40 दिनों की देशव्यापी लॉकडाउन से भारतीय अर्थव्यवस्था ठप हो गई है। इसी बीच लॉकडाउन को अब दो सप्ताह के लिए बढ़ा दिया गया है। बैंकर्स का कहना है कि जून या जुलाई से पहले अर्थव्यवस्था के पूरी तरह से खुलने की संभावना कम है। इससे विशेष रूप से छोटे और मझोले बिजनेस के लिए जो कुल लोन का करीब 20 फीसदी बनता है, सबसे बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। वहीं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के एक कार्यकारी निदेशक ने कहा कि आर्थिक वृद्धि सुस्त थी और कोरोनो वायरस संकट से जोखिम बढ़ गया है। वहीं उन्होंने कहा, अब हमारे पास यह ब्लैक स्वान इवेंट है, जिसका अर्थ है कि बिना किसी सरकारी प्रोत्साहन के कई तिमाहियों तक अर्थव्यवस्था का बुरा हाल रहेगा।

