नई दिल्ली: 1 जनवरी से ऐसे टैक्सपेयर जिनका सालाना टर्नओवर 5 करोड़ रुपये से कम है, उन्हें मंथली रिटर्न जैसे GSTR 3B और GSTR1 फाइल करने की जरूरत नहीं होगी. उन्हें केवल क्वार्टरली रिटर्न फाइल करना होगा. हालांकि हर माह चालान के जरिए पेमेंट करना होगा. यह फैसला गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) काउंसिल की 42वीं बैठक में लिया गया है. बैठक के बाद वित्त सचिव अजय भूषण पांडे ने प्रेस कांफ्रेंस में इस बात की जानकारी दी.
हालांकि पूरे दिन चली बैठक के बावजूद केन्द्र व सभी राज्यों में जीएसटी क्षतिपूर्ति के मुद्दे पर केन्द्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए विकल्पों पर सहमति नहीं बन सकी. इस मुद्दे को अब अगली जीएसटी काउंसिल बैठक में सुलझाने की कोशिश की जाएगी. अगली बैठक 12 अक्टूबर को होगी.
जीएसटी परिषद ने जून 2022 के बाद भी क्षतिपूर्ति उपकर जारी रखने का निर्णय किया है. जीएसटी काउंसिल के अन्य फैसलों में से एक यह भी रहा कि अब राज्यों को जीएसटी क्षतिपूर्ति के तहत उपलब्ध कराए गए दो विकल्पों में से पहले के तहत 97000 करोड़ की जगह 1.1 लाख करोड़ रुपये उधार के तौर पर मुहैया कराए जाएंगे.
विगत 27 अगस्त को हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में चालू वित्त वर्ष में जीएसटी रेवेन्यू में 2.35 लाख करोड़ रुपये के शॉर्टफॉल का अनुमान जताया गया था. इस रेवेन्यू में गिरावट की भरपाई के लिए केंद्र ने दो विकल्प दिए थे. पहले विकल्प के तहत राज्य आरबीआई से विशेष विंडो के तहत 97 हजार करोड़ रुपये कर्ज ले सकते हैं. दूसरे विकल्प के तहत केंद्र 2.35 लाख करोड़ रुपये बाजार से उधार लेकर राज्यों की दे. वित्त मंत्री ने यह भी कहा है कि ऐसा नहीं है कि जो राज्य केन्द्र द्वारा दिए गए दो विकल्पों मं से किसी को भी नहीं चुनते हैं, वे खाली हाथ रह जाएंगे. उनके लिए भी समाधान ढूंढ़ा जाएगा.
कांफ्रेंस में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस साल आया कंपंजेशन सेस 20000 करोड़ रुपये है. इसे सोमवार रात को ही राज्यों को वितरित किया जाएगा. इसके अलावा अगले सप्ताह के आखिर तक उन राज्यों को 24000 करोड़ रुपये का IGST बकाया जारी किया जाएगा, जिन्हें पहले कम मिला है. बाकी राज्यों को एक्स्ट्रा फंड बाद में दिया जाएगा.

