मुंबई: कोरोना महामारी का संकट झेलते हुए व्यापारी और लघु उद्यमियों को 6 महिने हो गए. इस दौरान उद्योग-व्यापार की हालत बद से बदतर होती जा रही है. आवश्यक वस्तुओं और औषधि जैसे कुछ क्षेत्रों को छोड़ अधिकांश कारोबार बुरी तरह प्रभावित होने से इन क्षेत्रों के लाखों व्यापारियों और लघु उद्यमियों का आर्थिक संकट बढ़ता जा रहा है. नतीजन लॉकडाउन में गरीबों की दिल खोल कर मदद करने वाला यह वर्ग अब खुद मदद के लिए तरस रहा है, परंतु मदद के नाम सरकारें केवल आश्वासन दिए जा रही है. केंद्र सरकार के भारी भरकम पैकेज में सिर्फ गारंटी रहित लोन है और राज्य सरकार ने तो कोई टैक्स रियायत या पैकेज, कुछ नहीं दिया है. अब व्यापारी यही सवाल कर रहे हैं कि 6 महिने बीत गए. कब आएगा केंद्र और महाराष्ट्र सरकार का पैकेज?
व्यापारियों का कहना है कि केंद्र 33% इनकम टैक्स और 12 से 18% जीएसटी वसूल रही है तो राज्य सरकार एवं मनपा प्रॉपर्टी टैक्स, लाइसेंस फीस, वाटर चार्ज, कमर्शियल बिजली बिल और टीआरसी इत्यादि तमाम तरह के टैक्स लेती हैं. आज तमाम तरह के टैक्स बोझ मिला कर देखे जाए तो व्यापारी या लघु उद्यमी के मुनाफे का 60% से अधिक तो टैक्स के रूप में चला जाता है. क्या मौजूदा संकट में सरकार इस टैक्स बोझ को कुछ अवधि के लिए कम नहीं कर सकती है?
व्यापारिक महासंघ ‘कैट’ के मुंबई महानगर अध्यक्ष शंकर ठक्कर का कहना है कि इस महामारी के कारण व्यापारी और लघु उद्यमी भीषण संकट में आ रहे हैं, लेकिन ना केंद्र को, ना राज्य सरकार को हमारी कोई चिंता है. कोरोना से प्रभावित हर सेक्टर को केंद्र सरकार ने वित्तीय पैकेज दिया, लेकिन 20 लाख करोड़ रुपए के भारी आर्थिक पैकेज में व्यापारियों के लिए कोई मदद नहीं दी गई. यदि जल्द केंद्र और राज्य सरकार ने आर्थिक पैकेज घोषित नहीं किए तो देश में करीब 1.75 करोड़ दुकानों पर ताला लग सकता है. मदद करना तो दूर उल्टे सरकार नए टैक्स लगाकर हमारी परेशानी बढ़ा रही है. एक अक्टूबर से 1% का TCS थोप दिया गया है.

