नई दिल्ली: कोरोना संकट की वजह से पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनी इंडियन ऑयल (आईओसी) को 2019-20 की मार्च तिमाही में शुद्ध घाटा हुआ है। पिछले चार साल में पहली बार किसी तिमाही में भारी घाटा हुआ है। देश में लॉकडाउन और महंगा कच्चा तेल खरीदने की वजह से पेट्रोलियम की मांग में भारी गिरावट आई। जिसका असर ये हुआ कि कंपनी को मार्च तिमाही में 51.85 अरब रुपये के भारी घाटे का सामना करना पड़ा। जबकि कंपनी को 2018-19 की समान तिमाही में 60.99 अरब रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था।
घाटे की एक बड़ी वजह यह है कि कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट की वजह से कंपनी को इन्वेंट्री (जमा कच्चा माल) में भारी नुकसान उठाना पड़ा। बीते कल बुधवार को कंपनी ने एक बयान में कहा, लॉकडाउन के दौरान तेल नहीं बिकने के कारण उसे भारी नुकसान हुआ है। इस दौरान उसकी आय सालाना आधार पर 3.35 फीसदी कम होकर 1,42,371.85 करोड़ रुपये रही। इसके अलावा, कंपनी की परिचालन से प्राप्त आय 2.7 फीसदी घटकर 1.4 लाख करोड़ रुपये रही।
इसी बीच रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल ने कहा कि अगर भारतीय कंपनियों की आय में 18 महीने तक सुधार नहीं हुआ तो उनकी रेटिंग और घट सकती है। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के साख विश्लेषक ने कहा कि भारतीय कंपनियों की 35 फीसदी क्रेडिट रेटिंग्स का परिदृश्य नकारात्मक है या वह नकारात्मक प्रभाव के साथ निगरानी में है। ऐसी 7 में से 2 कंपनियों की रेटिंग अव्यवहार्य ग्रेड श्रेणी में है। इनकी कमाई पर अधिक उतार-चढ़ाव रहने की आशंका है। इंडिया रेटिंग्स का अनुमान है कि भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार 2020-21 में 5.3 फीसदी घटेगा।

