नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) में विनिवेश की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वित्त मंत्रालय ने कंपनी के प्रस्तावित आईपीओ पर सरकार को शुरुआती सलाह देने के लिए कंसल्टिंग फर्मों, इनवेस्टमेंट बैंकरों और वित्तीय संस्थानों से बोलियां आमंत्रित की हैं। सरकार इस आईपीओ के लिए में शुरुआती प्रक्रियाओं के डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (दीपम) की मदद से दो प्री-आईपीओ ट्रांजेक्शन एडवाइजर नियुक्त करना चाहती है।
वित्त मंत्रालय ने इस संबध रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी किया है। इच्छुक फर्में 13 जुलाई तक अपनी बोलियां जमा कर सकती हैं। यब बोली 14 जुलाई को दीपम द्वारा खोली जाएंगी। वह लेनदेन के ढ़ाचे, निवेशकों को आकर्षित करने के लिए रोड शो आयोजित करने, अधिकतम मूल्य लाने के उपाय सुझाने और अल्पांश बिक्री की स्थिति आदि के बारे में सलाह और सहायता देगी।
इसमें यह शर्त रखी गई है कि कंसल्टेंसी के लिए बोली लगाने वाली फर्म के पास कम से कम तीन साल तक आईपीओ, रणनीतिक विनिवेश, रणनीतिक बिक्री, एमएंडए गतिविधियों और निजी इक्विटी निवेश लेनदेन आदि में अनुभव होना चाहिए। मंत्रालय ने कहा कि एडवाइर फर्म प्रस्तावित आईपीओ के प्रारंभिक पहलुओं को सुनिश्चित करेंगी और आईपीओं के तौर-तरीकों और टाइमिंग के बारे में सलाह और सहायता देगी।
आरएफपी के मुताबिक बोलीदाता के पास 1 अप्रैल 2017 से 31 मार्च, 2020 के बीच 5,000 करोड़ रुपये या उससे अधिक आकार के आईपीओ में लेनदेन की सलाह का अनुभव होना चाहिए। या इस अवधि के दौरान उसने 15,000 करोड़ रुपये या उससे अधिक के पूंजी बाजार लेनदेन का प्रबंधन किया हो।

