बढ़ती कीमतों और ऊंचे होम लोन के बावजूद 2023 में देश के रियल एस्टेट क्षेत्र में बूम देखा गया। आवासीय संपत्तियों की बिक्री के पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ गए। भारत के शीर्ष 7 शहरों में लगभग 4.77 लाख मकानों की रिकॉर्ड बिक्री हुई। नए लॉन्च हुए घरों की बिक्री भी काफी अच्छी रही और 4.46 लाख यूनिट के करीब पहुंच गई. इस सेक्टर की ये रफ्तार बरकरार रहेगी ये आगामी अंतरिम बजट पर काफी निर्भर करता है, रियल एस्टेट बाजार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और RBI से काफी उम्मीदें हैं.
आम चुनाव से पहले ये मोदी सरकार का आखिरी बजट है. अन्य सेक्टरों की तरह रियल एस्टेट सेक्टर की भी नजरें इस बजट पर हैं. प्रॉपर्टी बाजार को पूरी उम्मीद है कि इस बजट में इनकम टैक्स को लेकर कोई बड़ी घोषणा हो सकती है. चुनाव से पहले टैक्स छूट की घोषणा कर मतदाताओं को सरकार आकर्षित कर सकती है. यह बजट अंतरिम है फिर भी सरकार चुनाव से पहले टैक्स छूट जैसी घोषणाएं कर सकती है. अगर ऐसा होता है तो रियल एस्टेट सेक्टर को भी फायदा होगा।
क्रेडाई के मुताबिक 2024 की दूसरी तिमाही तक रेपो रेट में कटौती की संभावना नहीं है. ऐसे में होम लोन पर टैक्स का दायरा बढ़ाने की जरूरत है. इस बजट में क्रेडाई ने होम लोन पर टैक्स छूट को 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की मांग की है. NAREDCO नेभी जीएसटी के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट और किराये के आवास के लिए प्रोत्साहन समेत अन्य बजटीय सहायता और टैक्स प्रोत्साहन की मांग की है. प्रस्तावित टैक्स छूट से रियल एस्टेट सेक्टर में मांग बढ़ने की उम्मीद है। क्रेडाई का मानना है कि स्थायी क्षेत्र के विकास के लिए मांग में वृद्धि होनी चाहिए, जिसे करदाताओं को आकर्षक कर लाभ प्रदान करके हासिल किया जा सकता है।

