मुंबई। कहते हैं कि रूपए में कमजोरी आना और उसका लगातार ग्राफ गिरना एक बड़ी समस्या होती है और उससे निजात के लिए सरकार को प्रयास करने चाहिए। रुपये में कमजोरी के चलते कहीं फायदा तो कहीं नुकसान होता है लेकिन ज्यादातर नुकसान ही होता है। हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार को रुपया इंट्राडे में फिसलकर 72.03 प्रति डॉलर तक आ गया। एक्सपर्ट आगे भी इसमें गिरावट की आशंका जता रहे हैं।
शुक्रवार को साल 2019 में रुपया पहली बार 72 डॉलर के नीचे आया और यह 9 महीनों की सबसे बड़ी गिरावट है। एक्सपर्ट का कहना है कि पिछले दिनों बाजार में ऐसे कई फैक्टर रहे हैं, जिनकी वजह से रुपये में गिरावट आई है। वहीं यह गिरावट अभी आगे भी जारी रहने की उम्मीद है। अगले 15 दिनों की बात करें तो यह 73 और साल के अंत तक 74 प्रति डॉलर तक कमजोर हो सकता है। फिलहाल रुपये की कमजोरी से जहां कुछ सेक्टर्स को नुकसान होता है, वहीं कुछ को सपोर्ट मिलता है।
केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि ट्रेड वार के चलते पिछले 20 दिनों में एशियन करंसी में बड़ी गिरावट रही है। युआन अपने 11 साल के लो पर आ गया है। एशियन करंसी के खराब प्रदर्शन के लपेटे में घरेलू करंसी भी आ गई है। वहीं, मॉनूसन के रिकवरी की बात कही जा रही है, लेकिन 14 राज्यों में बाढ़ की स्थिति से फसलों का भी नुकसान हुआ है। यह भी रुपये के लिए निगेटिव सेंटीमेंट हैं।
बजट के बाद से बात करें तो विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जिससे रुपया टूट गया है। बजट में इंडस्ट्री को बूस्ट देने वाली कोई बात साफ तौर पर नहीं कही गई, जिससे सेंटीमेंट खराब हुए। इक्विटी मार्केट में करेक्शन का भी असर रुपये पर हुआ। ग्लोबली स्लोडाउन भी इसके पीछे वजह रही है।
यहां पर मिलता है गिरावट का भी फायदा
जिन कंपनियों का रेवेन्यू मुख्य तौर पर एक्सपोर्ट बेस है, उन्हें फायदा होगा। डॉलर के मजबूत होने का सबसे ज्यादा फायदा आईटी और फॉर्मा सेक्टर को होगा। इसमें टीसीएस, इंफोसिस, अरबिंदो फार्मा, कैडिला और विप्रो जैसी कंपनियां शामिल हैं। दरअसल आईटी कंपनियों की बड़ी कमाई एक्सपोर्ट से होती है, ऐसे में कमजोर रुपये से फायदा मिलेगा।
रुपये में कमजोरी से फार्मा कंपनियों को भी फायदा होगा। फार्मा कंपनियों के कारोबार में एक्सपोर्ट बड़ा हिस्सा है और डॉलर में आमदनी का बड़ा हिस्सा है। ओएनजीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज और ऑयल इंडिया लिमिटेड जैसे गैस प्रोड्यूसर्स को भी डॉलर में तेजी का फायदा मिलेगा।

