नई दिल्ली: हाल ही में एलन मस्क की कंपनी टेस्ला ने बिटकॉइन में 1.5 अरब डॉलर का निवेश किया है। इस निवेश ने बिटकॉइन को एक नई बुलंदी पर पहुंचा दिया है। फिलहाल एक बिटकॉइन की कीमत 46 हजार डॉलर यानी लगभग 34 लाख रुपये के करीब पहुंच गई है, लेकिन भारत के निवेशक इस तेजी का जश्न नहीं मना पा रहे हैं। इसकी वजह ये है कि सरकार भारत में बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरंसी को बैन करने की तैयारी में है। अधिकतर निवेशक इसलिए बिटकॉइन में निवेश नहीं कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें लग रहा है कि अनजाने में वह किसी कानून का उल्लंघन ना कर दें। कुछ निवेशक तो इस पर वकीलों से कानूनी सलाह भी ले रहे हैं।
बहुत सारे अरबपतियों और उनके फैमिली ट्रस्ट ने लिब्रलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत विदेशी एक्सचेंज से बिटकॉइन खरीदे हैं। अब ये निवेशक वकीलों से कानूनी सलाह ले रहे हैं कि उन्हें इसे बेच देना चाहिए या नहीं और वह किसी कानून का उल्लंघन तो नहीं कर रहे हैं। इनमें से अधिकतर निवेशक बिटकॉइन से जुड़े जोखिम को अच्छे से समझते हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उन्हें लगा था कि सरकार बिटकॉइन पर अपना रुख नरम करेगी। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 2018 के रिजर्व बैंक के सर्कुलर पर रोक लगा दी थी, जिसके जरिए बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को वर्चुअल करंसी में डील करने या डील करने की सुविधा देने पर बैन लगाया गया था।

