नई दिल्ली: मोदी कैबिनेट ने लक्ष्मी विलास बैंक का DBS Bank India Ltd. में विलय की मंजूरी दी। इस फैसले के साथ ही अब बैंक पर लागू मोराटोरियम पीरियड 16 दिसंबर से घटकर 27 नवंबर तक रह गया।
उसके बाद बैंक के ग्राहकों पर निकासी संबंधी कोई लिमिट नहीं रहेगी। साथ ही 27 नवंबर से लक्ष्मी विलास बैंक के सभी ब्रांच डीबीएस बैंक के नाम से ऑपरेट होंगे। यह जानकारी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने दी है।
आज कैबिनेट में लिए गए फैसलों को लेकर केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस फैसले से जहां बैंक के 20 लाख जमाकर्ताओं को राहत मिलेगी, वहीं 4,000 कर्मचारियों की सेवाएं भी सुरक्षित रहेंगी। उन्होंने कहा कि लक्ष्मी विलास बैंक की की वित्तीय सेहत को खराब करने वाले लोगों को दंडित किया जाएगा।
जावडेकर ने कहा कि 20 लाख ग्राहक और 20,000 करोड़ रुपये की जमा अब पूरी तरह सुरक्षित है। उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। न ही भागदौड़ करने की जरूरत है। उनकी जमा सुरक्षित हाथों में है। हालांकि, डीबीआईएल की पूंजी की स्थिति काफी अच्छी है, लेकिन विलय के बाद अस्तित्व में आने वाली इकाई की ऋण की वृद्धि के लिए वह 2,500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी शुरू में ही लाएगी।

