कैश की कमी के चलते संकट में जूझ रहे लक्ष्मी विलास बैंक का DBS बैंक के साथ मर्जर का रास्ता साफ हो गया है. कैबिनेट ने आज रिजर्व बैंक आफ इंडिया के मर्जर प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद सिंगापुर के सबसे बड़े बैंक DBS बैंक की भारतीय इकाई में लक्ष्मी विलास बैंक का विलय हो जाएगा. ऐसा पहली बार होगा कि जब किसी भारतीय बैंक को डूबने से बचाने के लिए विदेशी बैंक में विलय किया जा रहा है.
लक्ष्मी विलास बैंक इस साल का दूसरा बैंक है जिसे RBI ने डूबने से बचाया है. इससे पहले मार्च में RBI ने यस बैंक को डूबने से बचाया था. आरबीआई के प्लान के मुताबिक सिंगापुर सरकार समर्थित डीबीएस, लक्ष्मी विलास बैंक में 2500 करोड़ रुपये का निवेश करेगा. इसके तहत लक्ष्मी विलास बैंक की 560 शाखाओं के जरिये डीबीएस बैंक की पहुंच इसके होम, पर्सनल लोन और स्मॉल स्केल इंडस्ट्री लोन ग्राहकों तक हो जाएगी.
इस डील के तहत DBS इंडिया को 563 ब्रांच, 974 ATM और रिटेल बिजनेस में 1.6 अरब डॉलर की फ्रेंचाइजी मिलेगी. वहीं, 94 साल पुराने लक्ष्मी विलास बैंक की इक्विटी भी पूरी तरह खत्म हो जाएगी. बैंक का पूरा डिपॉजिट DBS इंडिया के पास चला जाएगा.
बेलआउट पैकेज के तहत लक्ष्मी विलास बैंक के जमाकर्ताओं को उनका पूरा पैसा मिल जाएगा. अगर वे बैंक में अपना पैसा रखना चाहें तो भी वह सुरक्षित रहेगा. RBI के प्लान के मुताबिक लक्ष्मी विलास बैंक के कर्मचारी DBS बैंक के कर्मचारी बन जाएंगे. लेकिन लक्ष्मी विकास बैंक के शेयर होल्डर्स को घाटा होगा. अभी लक्ष्मी विलास बैंक का नेटवर्थ निगेटिव है. ऐसे में विलय में बैंक के शेयर होल्डर्स को पैसा नहीं मिलेगा.

