नई दिल्ली: आने वाले दिनों में जहां देश में प्राइवेट ट्रेनें शुरू होने जा रही है, वहीं इन ट्रेनों से यात्रा करना महंगा साबित होने वाला है. असल में एयरलाइसं कंपनियों की तर्ज पर प्राइवेट ट्रेनें भी अपना किराया खुद तय कर सकेंगी. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक देश में प्राइवेट ट्रेनें शुरू होने के बाद सरकार उन ट्रेनों को आपरेट करने वाली कंपनियों को इस तरह की छूट देने जा रही है.
भारत के रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके यादव ने बताया कि निजी कंपनियों को प्राइवेट ट्रेनों के लिए अपनी तरह से किराया तय करने की छूट होगी. हालांकि उन रूट पर अगर एसी बसें और प्लेन की भी सुविधा है तो किराया तय करने के पहले कंपनियों को इस बात का ध्यान रखना होगा.
भारत में रेलवे का किराया राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा रहा है. भारत में हर दिन आस्ट्रेलिया की आबादी के बराबर यात्री ट्रेनों से यात्रा करते हैं. देश के गरीबों का बड़ा हिस्सा परिवहन के लिए रेलवे के व्यापक नेटवर्क पर निर्भर करता है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक दशकों से चली आ रही लापरवाही और इनएफिसिएंट ब्यूरोक्रेसी की वजह से मोदी सरकार ने निजी कंपनियों को स्टेशनों के आधुनिकीकरण से लेकर ट्रेनों परिचालन ट्रेनों तक में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है.

