लखनऊ में जीएसआई का उत्तर क्षेत्रीय कार्यालय राजभाषा पर 3 दिन का सेमिनार आयोजित करेगा

अलग-अलग क्षेत्रों के भूवैज्ञानिकों द्वारा करीब 50 रिसर्च वर्क को पेश किया जाएगा

लखनऊ, 16 नवंबर 2021 : 171 साल पुराने भूवैज्ञानिक अनुसंधान संगठन, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा आजादी का अमृत महोत्सव (एकेएएम) के तत्‍वाधान में 16 से 18 नवंबर 2021 तक लखनऊ में जीएसआई के उत्तर क्षेत्रीय कार्यालय में ऑल इंडिया साइंटिफिक एंड टेक्निकल सेमिनार आयोजित किया जा रहा है। इसे राजभाषा डिविजन के सीएचक्यू का सहयोग प्राप्‍त है। इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य आधिकारिक भाषा हिंदी के इस्तेमाल के साथ तकनीकी और वैज्ञानिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही इन सारी गतिविधियों का विवरण आम जनता के साथ उनकी रोजाना बोली जाने वाली भाषा में शेयर करना रहा है।

सेमिनार के उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग के महानिदेशक श्री राजेंद्र सिंह गड़खल करेंगे। इस अवसर पर लखनऊ विश्वविद्यालय के उप-कुलपति डॉ. आलोक कुमार राय मुख्य अतिथि होंगे। भारत सरकार के खनन मंत्रालय के सचिव श्री आलोक टंडन समारोह के 18 नवंबर को होने वाले समापन सत्र में शामिल होंगे।

कार्यक्रम के दौरान चार सेशन में आमंत्रित वक्ता भू-विज्ञान के समकालीन विषयों पर अपने मुख्य व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे। जीएसआई के ऑफिसों में भू-वैज्ञानिक 50 तकनीकी और विज्ञान संबंधी शोधपत्र पेश करेंगे।

तीन दिवसीय सेमिनार में उत्तर भारत की प्रमुख शैक्षणिक संस्थाओं और यूनिवर्सिटीज के वाइस चांसलर्स और विभागाध्यक्ष शामिल होंगे। देश भर के भूवैज्ञानिक और जीएसआई के पूर्व कर्मचारी भी इस सेमिनार में हिस्सा लेंगे।

जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के बारे में
जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) की स्थापना 1851 में मुख्य रूप से रेलवे के लिए कोयला भंडारों का पता लगाने के उद्देश्य से की गई थी। इन वर्षों में जीएसआई न केवल देश के विभिन्न क्षेत्रों में भू-विज्ञान की जानकारी के भंडार के रूप में विकसित किया गया, बल्कि इसने दुनिया भर में मशहूर भू-वैज्ञानिक संस्थान का दर्जा भी प्राप्त कर लिया। इस संगठन के प्रमुख कार्यों में जमीनी सर्वेक्षण, हवाई और समुद्री सर्वेक्षण, खनिज पूर्वेक्षण और जांच, अलग-अलग विषयों से संबंधित भू-वैज्ञानिक, भू-तकनीकी, भू-पर्यावरण, प्राकृतिक खतरे के अध्ययन, ग्लेशियोलॉजी, सेस्मो टेक्टोनिक स्टडी और मौलिक अनुसंधान शामिल है।

जीएसआई की मुख्य भूमिका में नीति निर्धारक फैसलों, वाणिज्यिक और सामाजिक आर्थिक जरूरतों पर ध्यान देने के साथ ही उद्देश्यपूर्ण, निष्पक्ष और अप-डू-डेट भूवैज्ञानिक विशेषज्ञता हासिल करना है। इसके साथ ही यह सभी स्तरों की भू-वैज्ञानिक जानकारी भी प्रदान करता है। जीएसआई देश की जमीन और अपतटीय क्षेत्रों की सतह और उपसतह से प्राप्त सभी भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं के व्यवस्थित दस्तावेजीकरण पर ध्यान देता है। संगठन भू-भौतिकी, भू-रासायनिक और भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षणों समेत नवीनतम, किफायती प्रभावी तकनीकों और कार्यप्रणाली का उपयोग कर यह कदम उठाता है।

सर्वेक्षण और मैपिग में जीएसआई की क्षमता एक साथ बढ़ने, प्रबंधन, समन्वय और स्थान संबंधी डेटा बेस (रिमोट सेंसिंग के माध्यम से हासिल किए डेटा बेस समेत) से लगातार बढ़ोतरी हुई है। यह इस उद्देश्य के लिए क्षेत्र में रेपॉजिटरी या क्लियरिंग हाउस के तौर पर काम करता है। जियो-इंफॉर्मेटिक्स सेक्टर में अन्य हितधारकों के सहयोग और समन्वय से भू-वैज्ञानिक जानकारी और किसी स्थान विशेष से संबधित डेटा के प्रसार के लिए नई कंप्यूटर टेक्‍नेलॉजी का प्रयोग करता है।

जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया का मुख्‍यालय कोलकाता में है। लखनऊ, जयपुर, नागपुर, हैदराबाद, शिलॉन्ग और कोलकाता में कंपनी के 6 रीजनल ऑफिस और देश के लगभग सभी राज्यों में स्‍टेट यूनिट कार्यालय मौजूद हैं। हाल ही में जीएसआई के एक ऑफिस को खनन मंत्रालय से अटैच किया गया है।

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